लेखन - संवाद with Sakshi singh

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मसरूफ़ियत से मिले थोड़ी फुर्सत तो इत्मीनान हो जाऊँ मैं…
05/09/2026

मसरूफ़ियत से मिले थोड़ी फुर्सत तो इत्मीनान हो जाऊँ मैं…

थोड़ी चाहत हैथोड़ा बिछड़ने का डर है जो नहीं है वो है पाने का मोह…
03/09/2026

थोड़ी चाहत है
थोड़ा बिछड़ने का डर है
जो नहीं है वो है पाने का मोह…

ऑफिस में महीने की बेहतरीन न्यूज़ परफॉर्मर को सम्मानित किया जा रहा था, मैं पीछे खड़ी सभी के लिए तालियाँ बजा रही थी। तभी म...
21/07/2026

ऑफिस में महीने की बेहतरीन न्यूज़ परफॉर्मर को सम्मानित किया जा रहा था, मैं पीछे खड़ी सभी के लिए तालियाँ बजा रही थी। तभी मेरा भी नाम बुलाया गया और मेरी न्यूज़ के लिए मुझे के “बहुत ही बढ़िया” सम्मान से स्टेट एडिटर मोहन बागवान सर के हाथों सम्मानित किया गया। मेरे काम को सराहा गया।

सीनियर्स का खूब मार्गदर्शन और टीम का सहयोग रहा।
Thank You

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर दैनिक भास्कर की पहल ' एक पेड़ एक जिंदगी' के तहत ऑफिस में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकत...
05/06/2026

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर दैनिक भास्कर की पहल ' एक पेड़ एक जिंदगी' के तहत ऑफिस में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु सभी कर्मचारियों को पौधा वितरित किया गया।

आदरणीय गौरव पांडेय सर के हाथों पौधा रिसीव करते हुए…

02/06/2026

मेरे रूठने पर अब मुझे मनाता नहीं था वो
मैं उसे मनाऊँ तो मानता भी नहीं था वो
अब रूठने लगा था बात-बात पर मुझसे
क्योंकि दूरियाँ जो बनाने लगा था वो …

01/06/2026

रोज़ तारों को नुमाईश में ख़लल पड़ता है
चाँद पागल है अंधेरे में निकल पड़ता है
याद आई है उसकी
सांसो जरा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है…
- राहत साहब

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