17/08/2026
बाघमारा विधानसभा क्षेत्र के छाताबाद में आज जो भयावह मंजर देखने को मिल रहा है, वह कोई प्राकृतिक त्रासदी नहीं बल्कि वर्षों से जारी कोयला चोरी और अवैध खनन की उस भयावह सच्चाई का परिणाम है, जिसने पूरे इलाके को तबाही के कगार पर पहुंचा दिया है। पूरा गांव का घर ज़मींदोज़ हो गया.
जिन घरों में कभी खुशियां बसती थीं, आज वहां डर का साया है। जिन जमीनों पर लोगों ने पीढ़ियां गुजारीं, आज वही जमीन उनके लिए खतरा बन चुकी है। यह सिर्फ जमीन और घरों का धंसना नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सपनों, सुरक्षा और भविष्य का धंसना है।
आज कतरास के छाताबाद में ग्रामीणों द्वारा चलाए जा रहे 'आशियाना बचाओ आंदोलन' के समर्थन में पहुंचा। इसके बाद भू-धसान प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर उन परिवारों से मुलाकात की, जिनके सिर पर आज अपना ही घर और जमीन खोने का खतरा मंडरा रहा है।
इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधि कहाँ सो रहे हैं ? वे कब इन मजबूरों के साथ खड़े होंगे। अवैध कोयला का बड़ा कारोबार इस इलाके में होता है, बच्चा बच्चा सब जानता है।
कौन इनका संरक्षक है, ये भी हर बच्चा जानता है। फिर भी केंद्र और राज्य सरकार के प्रशासनिक पदाधिकारियों और इन जनप्रतिनिधियों के आँख पर पट्टी और कान में बहरापान क्यों है ?
पीड़ित परिवार से जब मैं मिला उनकी आंखों में डर, दर्द और बेबसी साफ दिखाई दे रही थी। किसी का आशियाना खतरे में है, तो किसी के सामने अपने बच्चों के भविष्य की चिंता है। उनकी पीड़ा और समस्याओं को बेहद संवेदनशीलता के साथ सुना। सच कहूं तो वहां का भयावह मंजर देखकर मन बेहद व्यथित हुआ। सिर्फ जमीन और घरों का धंसना नहीं है, यह गरीबों के सपनों और वर्षों की मेहनत का धंसना है।
जिला प्रशासन, बीसीसीएल और सीआईएसएफ जैसी जिम्मेदार संस्थाओं की मौजूदगी के बावजूद आखिर लोगों की जिंदगी बर्बाद करके कोयला चोरी और अवैध खनन कैसे जारी है ?
अगर समय रहते इस पर रोक लगाई गई होती, तो शायद आज इन परिवारों को अपने ही आशियाने और जान की सलामती के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता।
मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं इन परिवारों को उनके हाल पर नहीं छोड़ा जाएगा। उनकी सुरक्षा, पुनर्वास, विस्थापन और उचित मुआवजे के लिए सड़क से लेकर सदन तक हर स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।
जिस घर को एक गरीब ने खून-पसीने से बनाया है, उसे यूं ही उजड़ने नहीं दिया जा सकता। जिस जमीन पर किसी परिवार की पीढ़ियां बसी हों, उसे मुनाफे और अवैध कारोबार की भेंट नहीं चढ़ने दिया जा सकता।
संकट की इस घड़ी में मैं छाताबाद के प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा हूं... संघर्ष जारी है