04/06/2026
💼📜 धीरूभाई अंबानी से दशकों पहले गुजरात के सर अब्दुल करीम अब्दुल शकूर जमाल ने पेट्रोलियम और व्यापार की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली थी।
🏙️ जामनगर में जन्मे सर जमाल ने अपने परिवार के साथ बर्मा (वर्तमान म्यांमार) जाकर ‘जमाल ब्रदर्स एंड कंपनी लिमिटेड’ के माध्यम से एक विशाल कारोबारी साम्राज्य खड़ा किया।
🌾☕🌳 उनके व्यापार का विस्तार चावल, कपास, रबर, चाय, चीनी, लकड़ी और खनन जैसे अनेक क्षेत्रों तक फैला हुआ था।
👑 चावल के व्यापार में असाधारण सफलता के कारण उन्हें "किंग ऑफ राइस" कहा गया, जबकि पेट्रोलियम क्षेत्र में उनके प्रभाव और योगदान ने उन्हें "ऑयल किंग" की पहचान दिलाई। ⛽👑
🛢️ उन्होंने ब्रिटिश भारत के दौर में तेल व्यापार की संभावनाओं को समझते हुए ‘जमाल ऑयल कंपनी लिमिटेड’ की स्थापना की।
📈 बाद में यह कंपनी 1909 में पुनर्गठित होकर ‘इंडो-बर्मा पेट्रोलियम कंपनी लिमिटेड (IBP)’ के नाम से जानी गई।
🌍 उस दौर में जब तेल व्यापार पर विदेशी कंपनियों का लगभग एकाधिकार था, तब IBP ने पेट्रोलियम वितरण और मार्केटिंग के क्षेत्र में एक मजबूत भारतीय पहचान स्थापित की।
🏆 इसी कंपनी की सफलता और विस्तार ने सर जमाल को भारतीय व्यापार जगत के सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों में शामिल कर दिया।
🏛️ रंगून (यांगून) स्थित उनका प्रसिद्ध ‘जमाल विला’ भारतीय प्रवासियों, समाजसेवियों और राष्ट्रवादी नेताओं का महत्वपूर्ण केंद्र था।
🤝 बताया जाता है कि महात्मा गांधी भी कई अवसरों पर यहाँ ठहरे थे।
✨ उनकी दूरदर्शिता, नेतृत्व क्षमता और व्यावसायिक समझ ने उन्हें अपने समय के सबसे सफल भारतीय उद्यमियों में स्थान दिलाया।
📜 लगभग 98 वर्षों तक चलने वाली यह ऐतिहासिक कंपनी अंततः 2007 में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) में विलय हो गई।
🕊️ वर्ष 1924 में उनके निधन के बाद भी उनकी कारोबारी विरासत आज इतिहास के पन्नों में प्रेरणा, दूरदर्शिता और भारतीय उद्यमिता के शानदार उदाहरण के रूप में दर्ज है।
🌟 सर अब्दुल करीम अब्दुल शकूर जमाल उन भारतीय उद्योगपतियों में से थे, जिन्होंने विदेशी प्रभुत्व के दौर में भी अपनी मेहनत, बुद्धिमत्ता और साहस से व्यापार की दुनिया में अमिट छाप छोड़ी। 💼🛢️📖✨