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29/03/2022
Upcoming live video
29/03/2022

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30/11/2018

उस व्यक्ति ने सब की खातिर बहुत कुछ किया पर उस व्यक्ति के लिए कोई कुछ नहीं कर पाए उसने कभी नहीं सोचा था की ऐसा कभी होगा पर कोई काम करता है तो उसके फल के बारे में सोच भी नहीं पाता है और सोचे भी क्यों जब काम सबकी भलाई के लिए हो,

ऐसा ही व्यक्ति है रामकुमार, हमेशा सबकी भलाई के काम करना, सबकी बाते मानना और दिल से भी बहुत अच्छा था रामकुमार, रामकुमार की आदत ऐसी थी की कोई भी अगर मांगने वाला भी आ जाये तो भी वह खाली हाथ नहीं जाता था,
रामकुमार बड़ा भाई था और रामनरेश छोटा था रामकुमार ही पूरे घर की जिम्मेदारी निभाता था उनके पिता की तबियत अब ठीक नहीं रहती थी इसलिए रामकुमार ही घर के सारे काम को करता था रामनरेश सिर्फ हाथ बटाता था जबकि उसके पास कोई काम नहीं था

रामकुमार की पत्नी बहुत ही सज्जन थी जबकि रामनरेश की पत्नी में अभी भी घमंड ही था किस बात का ये पता नहीं है एक दिन रामकुमार की पत्नी से रामनरेश की पत्नी का झगड़ा हो गया और बहुत बाते होने पर झगड़े को बंद किया गया उस दिन से सभी लोगो में अशांति सी फैल गयी
अब सभी लोग ज्यादा देर तक बाते नहीं करते थे छोटा सा झगड़ा अब बढ़ गया था कुछ दिन बाद बोल-चल भी बंद हो गयी थी और कोई भी बात को सुनने पसंद नहीं कर रहा था झगड़ा कैसे खत्म हो इस बात का पता बिलकुल भी नहीं चल रहा था

रामकुमार ने सबकी खातिर बहुत कुछ किया था लेकिन रामनरेश की पत्नी यही कह रही थी की इन्होने ने कोन सा काम किया है जो साड़ी बाग़ डोर इनके हाथो में है कुछ मेरे पति को भी मिलना चाहिए रामनरेश भी अपनी पत्नी का साथ दे रहा था अब सब कुछ उसे सही लग रहा था

रामकुमार को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की क्या किया जाए और इस झगड़े को कैसे बंद किया जाए पूरी रात सोचते हुए रामनरेश ने काट दी और सुबहे होते ही अपनी पत्नी के साथ रामकुमार वह घर छोड़ कर चला गया शायद यही एक सही तरीका उसे नज़र आ रहा था

अब उस घर में रामनरेश का ही राज था जो चाहे वह कर सकता था अब कोई भी उसे रोकने वाला नहीं था और कुछ दिन बाद रामनरेश ने सब कुछ गवा दिया था धीर-धीर रामनरेश की हालत भी अब ठीक नहीं रहती थी शायद उसके कर्म ही आगे आ रहे थे उसने अपने बड़े भाई के साथ गलत किया था

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जब सब कुछ हो जाता है तब अगर हमे अक्ल आ भी जाए तो उसका कोई फायदा नहीं था बहुत ढूढ़ने पर भी रामकुमार का कोई पता नहीं था कोई नहीं जनता है की रामकुमार कहा है किसी ने भी नहीं देखा की रामकुमार और उसकी पत्नी कहा गए रामकुमार तो अपना फर्ज निभा रहा था

sab ki khatir, hindi stories, रामकुमार जैसा आदमी कही नहीं मिलेगा जिसने सारी सुख सुविधा दी और सबका ख्याल रखा और उसी को घर से जाना पड़ा हम लोग भी इस बात का ध्यान नहीं रख पाते है की हमे क्या करना चाहिए और क्या नहीं, कभ-कभी जल्द बाजी में लिए गए फैसले अच्छे नहीं होते है जिनका परिणाम कुछ और ही निकलता है इसलिए दोस्तों सोच कर ही फैसला ले और सबका का ख्याल रखे.

17/09/2017
24/06/2017

न जाने कब खर्च हो गये, पता ही न चला,
वो लम्हे, जो छुपाकर रखे थे जीने के लिये।



बहुत सा पानी छुपाया है मैंने अपनी पलकों में,
जिंदगी लम्बी बहुत है, क्या पता कब प्यास लग जाए।



न हथियार से मिलते हैं न अधिकार से मिलते हैं,
दिलों पर कब्जे बस अपने व्यवहार से मिलते है।



अपने दिल की अदालत में ज़रूर जाएं,
सुना है, वहाँ कभी गलत फैसले नहीं हुआ करते।



कॉल फ्री होने से क्या होता है साहिब,
दिलों में गुंजाइश भी तो होनी चाहिए बात करने के लिए।



घर अपना बना लेते हैं, जो दिल में मेरे,
मुझसे वो परिंदे, कभी उड़ाये नहीं जाते।



इतना क्यों सिखाए जा रही हो ज़िन्दगी,
हमें कौनसी सदियाँ गुज़ारनी है यहाँ।



यहाँ हर कोई रखता है ख़बर ग़ैरों के गुनाहों की,
अजब फितरत हैं, कोई आइना नहीं रखता।



मन को छूकर लौट जाऊँगा किसी दिन,
तुम हवा से पूछते रह जाओगे मेरा पता।



बेनूर सी लगती है तुमसे बिछड़ कर ये रातें,
चिराग तो जलते है मगर उजाला नही करते।



मिज़ाज़ अपना कुछ ऐसा बना लिया हमने,
किसी ने कुछ भी कहा, बस मुस्करा दिया हमने।



कुछ शिकवे ऐसे थे साहिब,
जो खुद ही कहे और खुद ही सुने।



शायर कहकर बदनाम ना करना मुझे दोस्तो,
मै तो रोज शाम को दिनभर का हिसाब लिखता हूं।



किस लिए, देखते हो तुम आईना,
तुम तो ख़ुद से भी, ज्यादा ख़ूबसूरत हो।



अभी काँच हूँ इसलिए सबको चुभता हूँ,
जिस दिन आइना बन जाऊँगा उस दिन पूरी दुनियाँ देखेगी

28/06/2015

तुने चाहा ही नही,हालात बदल सकते थे.
तेरे आँसु मेरे आंखो से निकल सकते थे.
तुम तो ठहरे रहे झील के पानी की तरह .
दरिया बनते तो आगे भी निकल सकते थे..created by gulzar

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