23/04/2026
भीड़ के बीच खड़ा है वो सुकून बनकर,
चेहरे पे हल्की मुस्कान जैसे कोई राज़ छुपाकर।
पीछे रंगीन रौशनी, आगे सीधा सा अंदाज़,
सादगी में ही दिखता है उसका असली अंदाज़।
ज़मीन पे कदम, मगर ख्वाब आसमान छूते हैं,
चुप रहकर भी उसके इरादे बहुत कुछ कहते हैं।
ना शोर की ज़रूरत, ना दिखावे की पहचान,
उसकी खामोशी ही बन जाती है उसकी असली शान।