15/06/2026
ये हैं नीरा आर्य जो भारत की पहली महिला जासूस थीं जिसने ऐशो-आराम, परिवार, विवाह और अंततः अपना शरीर तक देश की आज़ादी पर न्योछावर कर दिया। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की रक्षा के लिए अपने पति को भी मा’र डाला।जेल में अंग्रेजों की यातनाएं सहीं जेलर ने उनके स्तन तक काट दिए लेकिन निरा ने सुभास चंद्र बोस के बारे में एक शब्द तक नहीं बताया।
कौन हैं नीर आर्या?
उत्तर प्रदेश के एक संपन्न परिवार में जन्मी नीरा आर्य के सामने सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन था। लेकिन उन्होंने सुविधा नहीं, स्वतंत्रता चुनी। वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ीं और आज़ाद हिंद फौज की पहली महिला रेजीमेंट का हिस्सा बनीं। पर्दे के पीछे रहकर उन्होंने जासूसी का जोखिमभरा काम किया, जहाँ एक गलती की कीमत जान होती है।
नीरा के भीतर देशभक्ति कूट-कट कर भरी हुई थी, जिस वजह से वह आजाद हिंद फौज की झांसी रेजिमेंट से जुड़ गईं. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इस रेजिमेंट को अंग्रेज अपना जासूस मानते थे. वहीं, नीरा के पति को ही इस रेजिमेंट पर जासूसी करने की जिम्मेदारी दी गई, इतना ही नहीं उन्हें नेताजी की ह’त्या करने को भी कहा गया।
अपनी जिम्मेदारी को पूरा करते हुए नीरा के पति ने एक दिन मौका मिलते ही नेताजी पर गोली चला दी. हालांकि, वो गोली नेताजी के ड्राइव को लग गई, लेकिन नेताजी की जान बचाने के लिए नीरा ने पति की चाकू मारकर ह’त्या कर दी, इसके बाद अंग्रेजी सैनिकों ने नीरा को गिरफ्तार कर लिया.
जेल में हुई प्रताड़ित:
जेल में कैद करने के बाद अंग्रेजी सैनिक उनसे नेताजी के बारे में जानकारी लेने की कोशिश करने लगे, जिसके बदले वे उन्हें बेल पर रिहा करने का लालच भी देते रहे, लेकिन अंग्रेजों के कई बार पूछने पर भी नीरा कहती थी कि उनकी हवाई दुर्घटना में उनकी मौत हो गई. हालांकि, जेलर जानता था कि वो झूठ बोल रही हैं. फिर अनेकों बार पूछने पर नीरा कहतीं, 'वो मेरे दिल में है.'
जेलर ने कटवा दिया स्तन:
लाख कोशिशों के बाद भी जब ब्रिटिश सैनिक नीरा की हिम्मत नहीं तोड़ पाए तो जेलर को यह अपमान बर्दाश्त नहीं हो पाया. ऐसे में उसने अपनी झुंझलाहट निकालते हुए कहा, 'ठीक है लाओ तुम्हारा दिल ही निकालकर देख लेते हैं.' फिर क्या था जेलर ने नीरा का एक स्तन काटने का आदेश दे दिया. ब्रेस्ट रिपर के जरिए नीरा के दाएं स्तन को काटकर अलग कर दिया. इसके बाद जेलर ने नीरा को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर फिर ऐसी बदसलूकी की तो दूसरा स्तन भी काट दिया जाएगा.
1947 में आज़ादी मिली:
नीरा आर्य जेल से रिहा हुईं पर न सम्मान मिला, न पदक और ही ना ही कोई पेंशन। वे हैदराबाद की सड़कों पर फूल बेचकर जीवन चलाने को मजबूर हुईं। 1998 में वे चुपचाप इस दुनिया से चली गईं। नीरा आर्य ने कुछ मांगा नहीं। उन्होंने सिर्फ दिया, अपना जीवन, अपना सुख और अपना भविष्य।💐🇮🇳💐🇮🇳