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स्मार्टफोन की लत से परेशान एक गांव के लोगों ने ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे सोशल मीडिया का ध्यान खींच लिया।एक वायरल वीडियो ...
19/06/2026

स्मार्टफोन की लत से परेशान एक गांव के लोगों ने ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे सोशल मीडिया का ध्यान खींच लिया।

एक वायरल वीडियो में ग्रामीण अपने-अपने स्मार्टफोन तोड़ते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि मोबाइल की बढ़ती लत ने उनकी दिनचर्या, रिश्तों और मानसिक शांति पर बुरा असर डालना शुरू कर दिया था। इसी वजह से उन्होंने स्मार्टफोन छोड़कर दोबारा कीपैड फोन अपनाने का फैसला किया।

जहां कुछ लोग इस पहल को डिजिटल डिटॉक्स की मिसाल बता रहे हैं, वहीं कुछ का मानना है कि तकनीक से पूरी तरह दूरी बनाना समाधान नहीं है।

आप क्या सोचते हैं-क्या स्मार्टफोन की लत से बचने के लिए ऐसा कदम सही है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।।

🔥 जान बचाने के लिए जिसने अपनी जमा-पूंजी तक दांव पर लगा दी... दिल्ली के मालवीय नगर में होटल में लगी भीषण आग के दौरान कई ल...
18/06/2026

🔥 जान बचाने के लिए जिसने अपनी जमा-पूंजी तक दांव पर लगा दी... दिल्ली के मालवीय नगर में होटल में लगी भीषण आग के दौरान कई लोग ऊपरी मंजिलों पर फंस गए थे। ऐसे मुश्किल समय में रियाजुद्दीन नाम के एक व्यक्ति ने बिना अपनी परवाह किए लोगों की मदद के लिए आगे कदम बढ़ाया। बताया जाता है कि उन्होंने करीब 2 लाख रुपये के गद्दे बिछाकर फंसे हुए लोगों को सुरक्षित नीचे उतरने में मदद की, जिससे कई जानें बच सकीं।

उनकी बहादुरी और मानवता की इस मिसाल को अब आधिकारिक तौर पर सम्मान भी मिला है। दिल्ली सरकार ने रियाजुद्दीन को सम्मानित कर उनके साहस और निस्वार्थ सेवा को सराहा। यह घटना याद दिलाती है कि असली हीरो वही होते हैं जो संकट की घड़ी में दूसरों के लिए खड़े होते हैं, चाहे इसके लिए उन्हें खुद कितना भी नुकसान क्यों न उठाना पड़े।

सरकार ने 100% इथेनॉल को वाहन ईंधन के रूप में मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि अगले 6 हफ्तों में ...
16/06/2026

सरकार ने 100% इथेनॉल को वाहन ईंधन के रूप में मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि अगले 6 हफ्तों में कई कंपनियां इथेनॉल से चलने वाले वाहन लॉन्च करेंगी। सरकार का लक्ष्य पेट्रोल आयात कम करना, प्रदूषण घटाना और सस्ता वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध कराना है।

100% इथेनॉल (जिसे E100 भी कहा जाता है) को अगर आप किसी ऐसी सामान्य गाड़ी में डालेंगे जो इसके लिए नहीं बनी है, तो इंजन और गाड़ी के पार्ट्स को काफी नुकसान पहुँच सकता है।
आमतौर पर हमारी गाड़ियां पेट्रोल या हल्के इथेनॉल ब्लेंड (जैसे E10 या E20) के लिए डिजाइन होती हैं। शुद्ध इथेनॉल का इस्तेमाल करने पर निम्नलिखित मुख्य नुकसान हो सकते हैं:
1. पार्ट्स का गलना और खराब होना (Corrosion)
नुकसान: इथेनॉल स्वभाव से थोड़ा एसिडिक (अम्लीय) होता है और पानी को बहुत जल्दी सोखता है।
असर: यह सामान्य गाड़ियों के फ्यूल टैंक, एल्युमिनियम के पार्ट्स, रबर की पाइपलाइन, सील और प्लास्टिक के हिस्सों को धीरे-धीरे गलाने या काटने लगता है, जिससे फ्यूल लीक की समस्या हो सकती है।
2. इंजन स्टार्टिंग की समस्या (Cold Start Issues)
नुकसान: इथेनॉल का वाष्पीकरण (Evaporation) पेट्रोल की तुलना में बहुत कम होता है।
असर: सर्दियों के मौसम में या सुबह के समय गाड़ी को स्टार्ट करने में बहुत ज्यादा दिक्कत आएगी, क्योंकि सिलेंडर के अंदर आग पकड़ने के लिए सही मात्रा में वेपर (भाप) नहीं बन पाएगी।
3. माइलेज में भारी गिरावट (Low Fuel Economy)
नुकसान: इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी (Energy Density) पेट्रोल के मुकाबले लगभग 30% कम होती है।
असर: इसका मतलब है कि समान दूरी तय करने के लिए इंजन को ज्यादा इथेनॉल जलाना पड़ेगा। नतीजा यह होगा कि आपकी गाड़ी का माइलेज बहुत कम हो जाएगा और आपको बार-बार फ्यूल भरवाना पड़ेगा।
4. फ्यूल सिस्टम और इंजन डैमेज (Lean Running)
नुकसान: इथेनॉल को जलने के लिए पेट्रोल के मुकाबले कम हवा (Air-Fuel Ratio) की जरूरत होती है।
असर: अगर नॉर्मल गाड़ी में E100 डाल दिया जाए, तो इंजन का कंप्यूटर (ECU) हवा और ईंधन का सही तालमेल नहीं बना पाएगा। इससे इंजन 'Lean' चलेगा (यानी हवा ज्यादा और फ्यूल कम), जिससे इंजन बहुत ज्यादा गर्म (Overheat) हो सकता है और पिस्टन या वॉल्व डैमेज हो सकते हैं।
💡 महत्वपूर्ण बात: 100% इथेनॉल का इस्तेमाल सिर्फ उन्हीं गाड़ियों में सुरक्षित रूप से किया जा सकता है जो Flex-Fuel Vehicles (FFVs) होती हैं। इन गाड़ियों के इंजन, फ्यूल लाइन्स और सॉफ्टवेयर को खास तौर पर इस तरह से अपग्रेड किया जाता है कि वे बिना किसी नुकसान के 100% इथेनॉल को झेल सकें।





ये हैं नीरा आर्य जो भारत की पहली महिला जासूस थीं जिसने ऐशो-आराम, परिवार, विवाह और अंततः अपना शरीर तक देश की आज़ादी पर न्...
15/06/2026

ये हैं नीरा आर्य जो भारत की पहली महिला जासूस थीं जिसने ऐशो-आराम, परिवार, विवाह और अंततः अपना शरीर तक देश की आज़ादी पर न्योछावर कर दिया। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की रक्षा के लिए अपने पति को भी मा’र डाला।जेल में अंग्रेजों की यातनाएं सहीं जेलर ने उनके स्तन तक काट दिए लेकिन निरा ने सुभास चंद्र बोस के बारे में एक शब्द तक नहीं बताया।

कौन हैं नीर आर्या?

उत्तर प्रदेश के एक संपन्न परिवार में जन्मी नीरा आर्य के सामने सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन था। लेकिन उन्होंने सुविधा नहीं, स्वतंत्रता चुनी। वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ीं और आज़ाद हिंद फौज की पहली महिला रेजीमेंट का हिस्सा बनीं। पर्दे के पीछे रहकर उन्होंने जासूसी का जोखिमभरा काम किया, जहाँ एक गलती की कीमत जान होती है।

नीरा के भीतर देशभक्ति कूट-कट कर भरी हुई थी, जिस वजह से वह आजाद हिंद फौज की झांसी रेजिमेंट से जुड़ गईं. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इस रेजिमेंट को अंग्रेज अपना जासूस मानते थे. वहीं, नीरा के पति को ही इस रेजिमेंट पर जासूसी करने की जिम्मेदारी दी गई, इतना ही नहीं उन्हें नेताजी की ह’त्या करने को भी कहा गया।

अपनी जिम्मेदारी को पूरा करते हुए नीरा के पति ने एक दिन मौका मिलते ही नेताजी पर गोली चला दी. हालांकि, वो गोली नेताजी के ड्राइव को लग गई, लेकिन नेताजी की जान बचाने के लिए नीरा ने पति की चाकू मारकर ह’त्या कर दी, इसके बाद अंग्रेजी सैनिकों ने नीरा को गिरफ्तार कर लिया.

जेल में हुई प्रताड़ित:

जेल में कैद करने के बाद अंग्रेजी सैनिक उनसे नेताजी के बारे में जानकारी लेने की कोशिश करने लगे, जिसके बदले वे उन्हें बेल पर रिहा करने का लालच भी देते रहे, लेकिन अंग्रेजों के कई बार पूछने पर भी नीरा कहती थी कि उनकी हवाई दुर्घटना में उनकी मौत हो गई. हालांकि, जेलर जानता था कि वो झूठ बोल रही हैं. फिर अनेकों बार पूछने पर नीरा कहतीं, 'वो मेरे दिल में है.'

जेलर ने कटवा दिया स्तन:

लाख कोशिशों के बाद भी जब ब्रिटिश सैनिक नीरा की हिम्मत नहीं तोड़ पाए तो जेलर को यह अपमान बर्दाश्त नहीं हो पाया. ऐसे में उसने अपनी झुंझलाहट निकालते हुए कहा, 'ठीक है लाओ तुम्हारा दिल ही निकालकर देख लेते हैं.' फिर क्या था जेलर ने नीरा का एक स्तन काटने का आदेश दे दिया. ब्रेस्ट रिपर के जरिए नीरा के दाएं स्तन को काटकर अलग कर दिया. इसके बाद जेलर ने नीरा को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर फिर ऐसी बदसलूकी की तो दूसरा स्तन भी काट दिया जाएगा.

1947 में आज़ादी मिली:

नीरा आर्य जेल से रिहा हुईं पर न सम्मान मिला, न पदक और ही ना ही कोई पेंशन। वे हैदराबाद की सड़कों पर फूल बेचकर जीवन चलाने को मजबूर हुईं। 1998 में वे चुपचाप इस दुनिया से चली गईं। नीरा आर्य ने कुछ मांगा नहीं। उन्होंने सिर्फ दिया, अपना जीवन, अपना सुख और अपना भविष्य।💐🇮🇳💐🇮🇳

😢 कोयले की खदान में अपनी जान जोखिम में डालकर अपनी जान जोखिम में डालकर बचाई बेटी की जिंदगी...NEET में 695 अंक लाने वाले ड...
15/06/2026

😢 कोयले की खदान में अपनी जान जोखिम में डालकर अपनी जान जोखिम में डालकर बचाई बेटी की जिंदगी...

NEET में 695 अंक लाने वाले डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया, लेकिन कोयला मजदूर की बेटी होने के कारण कोई बधाई देने तक नहीं आया।

पिता का यह बलिदान और बेटी की मेहनत देखकर आंखें नम हो जाती हैं। समाज को ऐसे हीरों का सम्मान करना चाहिए।

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नाना पाटेकर केवल एक शानदार अभिनेता ही नहीं, बल्कि अपनी सादगी और देशप्रेम के लिए भी जाने जाते हैं। 🇮🇳कारगिल युद्ध के दौरा...
15/06/2026

नाना पाटेकर केवल एक शानदार अभिनेता ही नहीं, बल्कि अपनी सादगी और देशप्रेम के लिए भी जाने जाते हैं। 🇮🇳
कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने सैनिकों का मनोबल बढ़ाने और उनके बीच समय बिताने का निर्णय लिया। ऐसे कठिन समय में जवानों के साथ खड़े होना उनके देश के प्रति सम्मान और समर्पण को दर्शाता है। 🙏
चाहे कला का मंच हो या समाज सेवा का क्षेत्र, नाना पाटेकर हमेशा अपने कार्यों से लोगों को प्रेरित करते रहे हैं। उनकी यह भावना हमें सिखाती है कि देशभक्ति केवल बातों से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और योगदान से साबित होती है। ❤️🌟
🇮🇳🙏❤️

कभी-कभी जीवन में सबसे बड़ा सबक अपने ही लोग सिखा देते हैं। महाराष्ट्र के लातूर की 89 वर्षीय बुजुर्ग दादी ने अपनी वह संपत्...
15/06/2026

कभी-कभी जीवन में सबसे बड़ा सबक अपने ही लोग सिखा देते हैं। महाराष्ट्र के लातूर की 89 वर्षीय बुजुर्ग दादी ने अपनी वह संपत्ति वापस ले ली, जिसे उन्होंने प्यार और भरोसे के साथ अपने पोते के नाम कर दिया था। लेकिन जब वही पोता उनकी देखभाल और जिम्मेदारी निभाने में असफल रहा, तब दादी ने चुप रहने के बजाय अपने अधिकार के लिए आवाज उठाई।
यह कहानी सिर्फ एक संपत्ति की नहीं है, बल्कि सम्मान, आत्मसम्मान और न्याय की भी है। अक्सर बुजुर्ग अपने बच्चों और पोते-पोतियों के भविष्य के लिए अपनी पूरी जिंदगी की कमाई सौंप देते हैं, इस उम्मीद में कि बुढ़ापे में उन्हें प्यार, सहारा और सम्मान मिलेगा। लेकिन जब भरोसा टूट जाता है, तब कानून और साहस दोनों की जरूरत पड़ती है।
89 साल की उम्र में भी इस दादी ने यह साबित कर दिया कि उम्र चाहे कितनी भी हो जाए, अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना कभी गलत नहीं होता। उनका यह कदम उन सभी बुजुर्गों के लिए एक संदेश है कि सम्मान किसी एहसान का नाम नहीं, बल्कि उनका अधिकार है।

23 साल की उम्र में जहां अधिकांश लोग अपनी पहली नौकरी की तैयारी कर रहे होते हैं, वहीं छत्तीसगढ़ की चारू पांडे ने ऐसा काम क...
15/06/2026

23 साल की उम्र में जहां अधिकांश लोग अपनी पहली नौकरी की तैयारी कर रहे होते हैं, वहीं छत्तीसगढ़ की चारू पांडे ने ऐसा काम कर दिखाया है जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया। 😲
चारू ने केवल Self-Study (स्व-अध्ययन) के दम पर 19 सरकारी प्रतियोगी परीक्षाएँ पास कर लीं। बिना किसी महंगे कोचिंग संस्थान के, सिर्फ मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के सहारे उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। 📚✨
उनकी सफलता यह साबित करती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती। अब उन्हें राष्ट्रपति सम्मान मिलने की भी चर्चा है, जो उनकी उपलब्धि को और खास बनाता है। 🇮🇳🏅
चारू पांडे की कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है कि सफलता का सबसे बड़ा राज निरंतर मेहनत और खुद पर विश्वास है। ❤️

असम में हुए विमान हादसे में बिहार के दो लाल बलिदान हुए हैं। इनमें एक जहानाबाद जिले के हुलासगंज बनबरिया गांव के शुभम कुमा...
14/06/2026

असम में हुए विमान हादसे में बिहार के दो लाल बलिदान हुए हैं। इनमें एक जहानाबाद जिले के हुलासगंज बनबरिया गांव के शुभम कुमार और भोजपुर के दानिश आलम शामिल हैं।

पप्‍पू शर्मा के बेटे शुभम कुमार फ्लाइट लेफ्ट‍िनेंट के पद पर भारतीय वायुसेना में कार्यरत थे। पांच साल पहले उन्‍होंने नौकरी ज्‍वाइन की थी।

इसी साल नवंबर में उनकी शादी होनी थी। एक माह पहले अपनी दादी के श्राद्धकर्म में शामिल होने गांव आए थे। यहां से वे 10 दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे।

उनके बलिदान की सूचना मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। स्वजन के घर पर सगे-संबंधियों, ग्रामीणों और शुभम को जानने वाले लोगों का तांता लग गया।

हर किसी की आंखें नम थीं और लोग परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे रहे। महज 25 वर्ष की आयु में देश सेवा करते हुए उनके बलिदान की खबर ने पूरे जिले को गौरवान्वित होने के साथ-साथ गहरे दुख में भी डुबो दिया है।

एनडीए में सफल होकर बने थे फ्लाइट लेफ्ट‍िनेंट
शुभम कुमार वर्ष 2017 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय वायु सेना में शामिल हुए थे। अपनी प्रतिभा, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर उन्होंने कम समय में अपनी अलग पहचान बनाई थी।

14/06/2026

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