02/11/2025
"जहाँ ज़्यादातर बच्चे सपनों में खोए रहते हैं, वहीं हर्षिता प्रियदर्शिनी मोहंती ने धरती माँ को बचाने का सपना देखा।" 🌍 ओडिशा के कोरापुट जिले की कक्षा 8 की छात्रा हर्षिता ने देशी बीजों को संरक्षित करने में एक प्रेरक उदाहरण पेश किया है, जिससे उन्हें पूरे देश में 'सीड गर्ल' का खिताब मिला है।
2023 में, पद्म श्री कमला पुजारी से प्रेरित होकर, हर्षिता ने देशी बीज एकत्र करने का अपना मिशन शुरू किया। आज, उनके बीज बैंक में चावल की 180 से ज़्यादा दुर्लभ किस्में और 80 से ज़्यादा तरह के बाजरे हैं। 🌾🏺 इसमें कोरापुट कलजीरा, तुलसी भोग, रोगुसाई चावल और बाजरे की अनोखी प्रजातियाँ शामिल हैं।
हर्षिता का मानना है, "देशी बीज जलवायु के अनुकूल, पौष्टिक रूप से समृद्ध और किसानों के लिए किफ़ायती होते हैं, जिससे उन्हें हर मौसम में बीज खरीदने का खर्च नहीं उठाना पड़ता।" 💡 वह खेतों और स्थानीय बाज़ारों से बीज एकत्र करती हैं और नीम आधारित तरीकों का उपयोग करके उन्हें कीटों से बचाती हैं।
यह युवा पर्यावरण प्रेमी न केवल बीजों को संरक्षित कर रहा है, बल्कि जैविक खेती को भी बढ़ावा दे रहा है। हर्षिता गांवों में जाती हैं और युवाओं को अपने मिशन में शामिल होने के लिए प्रेरित करती हैं। अब तक, उन्होंने 50 से अधिक किसानों को मुफ्त में बीज वितरित किए हैं और पांच गांवों में जैविक खेती आंदोलन का नेतृत्व किया है। 🌱✨
हर्षिता का सपना एक कृषि वैज्ञानिक बनना और अपने आंदोलन को और आगे बढ़ाना है। उनकी कहानी दर्शाती है कि छोटी उम्र में भी कोई बड़ा सपना देख सकता है और उसे साकार करने के लिए अथक परिश्रम कर सकता है। 🌟
हर्षिता प्रियदर्शिनी मोहंती न केवल ओडिशा बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा की किरण बन गई हैं। उनके प्रयास समाज और पर्यावरण के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। ❤️👏