18/03/2026
भारत की सैन्य परंपरा में कुछ नाम केवल पदों से नहीं पहचाने जाते, बल्कि अपने निर्णयों, साहस और दृष्टि से इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं! ऐसा ही एक नाम था जनरल बिपिन रावत का! एक ऐसा सैनिक जिसने उत्तराखंड के पहाड़ों से निकलकर भारत की तीनों सेनाओं को एक धागे में पिरोने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई! लेकिन उनकी कहानी केवल ऊंचे पदों की नहीं है! इस कहानी में संघर्ष है, अनुशासन है, गलतियाँ हैं और उन गलतियों से निकलकर असाधारण उपलब्धियाँ हासिल करने का साहस भी है!
दिलचस्प बात यह है कि जिस व्यक्ति ने आगे चलकर भारत का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनकर सैन्य इतिहास में नई इबारत लिखी, उसी व्यक्ति को अपने प्रशिक्षण के दिनों में एक ऐसी सजा मिली थी जिसने उनकी सीनियॉरिटी तक छीन ली थी। कारण था – स्विमिंग पूल में छलांग न लगा पाना!
पहाड़ों से निकला एक सैनिक!
16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में बिपिन रावत का जन्म हुआ! यह परिवार साधारण जरूर था, लेकिन इसकी पहचान सेना से जुड़ी हुई थी! उनके दादा भी सेना में थे! उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रहे! इतना ही नहीं, उनके चाचा भी सेना में हवलदार के पद से सेवानिवृत्त हुए थे!
इस तरह कहा जाए तो सेना की वर्दी केवल पेशा नहीं थी, बल्कि यह उनके परिवार की विरासत थी! दिलचस्प संयोग यह भी रहा कि जिस 11 गोरखा राइफल्स की बटालियन में उनके पिता की पहली पोस्टिंग हुई थी, उसी बटालियन में आगे चलकर बिपिन रावत को भी नियुक्ति मिली! यहीं से एक नई सैन्य यात्रा की शुरुआत हुई।
स्कूल से सेना तक का सफर
बिपिन रावत की शुरुआती पढ़ाई देहरादून के कैम्ब्रियन हॉल स्कूल में हुई! इसके बाद उन्होंने शिमला के सेंट एडवर्ड्स स्कूल में शिक्षा प्राप्त की! बचपन से ही अनुशासन और सैन्य जीवन का माहौल उन्हें मिला था। इसलिए आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने नेशनल डिफेंस अकादमी, खडकवासला का रास्ता चुना!
एनडीए के बाद वे भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून पहुंचे! यहां उनका प्रदर्शन इतना शानदार रहा कि वे अपने कोर्स में मेरिट में सबसे ऊपर रहे और उन्हें प्रतिष्ठित “स्वॉर्ड ऑफ ऑनर” से सम्मानित किया गया! यह सम्मान केवल उसी कैडेट को मिलता है जो पूरे बैच में सर्वश्रेष्ठ साबित होता है!
एनडीए इंटरव्यू का दिलचस्प किस्सा!
उनकी जिंदगी का एक रोचक प्रसंग एनडीए इंटरव्यू से जुड़ा हुआ है! इंटरव्यू के दौरान सामने बैठे एक ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी ने उनसे पूछा-आपकी हॉबी क्या है! बिपिन रावत ने बिना झिझक जवाब दिया–ट्रेकिंग! इसके बाद अधिकारी ने उनसे एक और सवाल पूछा! अगर आपको किसी ट्रेक पर भेजा जाए और आप अपने साथ केवल एक चीज ले जा सकें, तो वह क्या होगी।
बिपिन रावत का जवाब था – माचिस की डिब्बी! जब उनसे कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जंगल या पहाड़ों में माचिस सबसे उपयोगी चीज साबित हो सकती है! आग जलाने से लेकर भोजन बनाने और सुरक्षा तक, यह छोटी सी चीज कई मुश्किलों को आसान बना सकती है! उनका यह व्यावहारिक जवाब इंटरव्यू लेने वाले अधिकारियों को बेहद प्रभावित कर गया।
स्विमिंग पूल की वह सजा!
लेकिन उनकी सैन्य यात्रा में सब कुछ हमेशा इतना आसान नहीं था! एनडीए प्रशिक्षण के दौरान एक दिन कैडेट बिपिन रावत को स्विमिंग पूल में ऊंचाई से छलांग लगाने का टास्क दिया गया!
यह प्रशिक्षण का हिस्सा था! लेकिन उस दिन वे यह छलांग नहीं लगा पाए! सेना में अनुशासन कठोर होता है। परिणामस्वरूप उन्हें सजा मिली और उनकी छह महीने की सीनियॉरिटी छीन ली गई!
यह घटना उनकी जीवनी “बिपिन: द मैन बिहाइंड द यूनिफॉर्म” में भी दर्ज है! किसी ने उस समय शायद यह कल्पना भी नहीं की होगी कि स्विमिंग पूल में छलांग लगाने से डरने वाला यही कैडेट आगे चलकर भारतीय सेना का प्रमुख बनेगा और फिर देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ भी!
सेना में शुरुआती जिम्मेदारियाँ!
16 दिसंबर 1978 को बिपिन रावत को 11 गोरखा राइफल्स की 5वीं बटालियन में कमीशन मिला! अपने शुरुआती सैन्य करियर में उन्होंने ऊंचाई वाले युद्धक्षेत्रों में लंबा समय बिताया!
अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास तैनाती हो या कश्मीर घाटी में आतंकवाद विरोधी अभियान–उन्होंने हर मोर्चे पर अनुभव हासिल किया! उनकी बटालियन 1987 में चीन के साथ सुमदोरोंग चु क्षेत्र में हुए सैन्य तनाव के दौरान भी तैनात रही थी!इस अनुभव ने उन्हें सीमाओं की वास्तविक चुनौतियों को करीब से समझने का अवसर दिया!
कश्मीर से कांगो तक!
कश्मीर में उन्होंने राष्ट्रीय राइफल्स के एक सेक्टर और बाद में 19 इन्फैंट्री डिवीजन का नेतृत्व किया! उनका नेतृत्व केवल भारत तक सीमित नहीं रहा! 2008 में वे संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत कांगो में बहुराष्ट्रीय ब्रिगेड के कमांडर भी रहे! कांगो में उस समय हालात बेहद तनावपूर्ण थे! कई विद्रोही समूह सक्रिय थे और हजारों नागरिकों की सुरक्षा खतरे में थी।
लेकिन उनके नेतृत्व में वहां की स्थिति को स्थिर करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली! म्यांमार ऑपरेशन जिसने दुनिया का ध्यान खींचा! 2015 में मणिपुर में आतंकवादियों ने घात लगाकर हमला किया जिसमें 18 भारतीय जवान शहीद हो गए!
इसके बाद भारतीय सेना ने एक साहसिक निर्णय लिया! 21 पैरा कमांडो की टीम ने सीमा पार जाकर म्यांमार में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया! उस समय यह ऑपरेशन थर्ड कॉर्प्स के अधीन था और उसके कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत थे!
इस ऑपरेशन ने दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अब सीमा पार से होने वाले हमलों का जवाब देने में हिचकिचाएगा नहीं! सर्जिकल स्ट्राइक और कड़ा संदेश-बाद के वर्षों में पाकिस्तान के खिलाफ हुई सर्जिकल स्ट्राइक के समय भी उनकी रणनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है!
उनका स्पष्ट संदेश था कि आतंकवाद को समर्थन देने वालों को इसकी कीमत चुकानी होगी! उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों पर कहा कि भारत को हमेशा अपने दुश्मनों से दो कदम आगे रहना होगा!
उनके शब्दों में -आतंकवादी अपनी रणनीति बदलते रहते हैं, इसलिए सेना को उनसे पहले कदम उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए।
जब बने भारतीय सेना के प्रमुख!
दिसंबर 2016 में बिपिन रावत को भारतीय सेना का 27वां प्रमुख नियुक्त किया गया! यह नियुक्ति चर्चा का विषय भी बनी क्योंकि उन्होंने दो वरिष्ठ अधिकारियों को पीछे छोड़ते हुए यह पद संभाला था!
लेकिन पद संभालने के बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण सैन्य सुधारों पर काम शुरू किया! उनकी प्राथमिकता थी-सेना का आधुनिकीकरण और भविष्य की युद्ध रणनीति।
देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ!
जनवरी 2020 में भारत सरकार ने उन्हें देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया! इस पद का उद्देश्य था – थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना! सीडीएस बनने के बाद उन्होंने थिएटर कमांड की अवधारणा को आगे बढ़ाया!
इस योजना के तहत तीनों सेनाओं को संयुक्त कमांड के माध्यम से संचालित करने की दिशा में काम शुरू हुआ! उन्होंने सेना के बजट प्रबंधन, तकनीकी आधुनिकीकरण और इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप जैसे कई महत्वपूर्ण सुधारों का रोडमैप तैयार किया!
निजी जीवन!
1985 में बिपिन रावत ने मधुलिका रावत से विवाह किया! मधुलिका रावत सेना से जुड़े परिवारों के कल्याण के लिए सक्रिय रूप से काम करती थीं! वे आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन और बाद में डिफेंस वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष भी रहीं!
यह दंपति दो बेटियों – कृतिका और तारिणी – के माता-पिता थे! वह दिन जिसने देश को झकझोर दिया! 8 दिसंबर 2021 का दिन भारत के लिए बेहद दुखद साबित हुआ!
तमिलनाडु के कुन्नूर के पास भारतीय वायुसेना का Mi-17 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया! इस हेलीकॉप्टर में जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और अन्य सैन्य अधिकारी सवार थे! इस दुर्घटना में कुल 13 लोगों की मृत्यु हो गई! पूरा देश स्तब्ध रह गया!
जिस व्यक्ति ने चार दशक से अधिक समय तक देश की सुरक्षा के लिए काम किया, उसका जीवन एक पल में समाप्त हो गया!
एक सैनिक की विरासत!
करीब 43 वर्षों की सैन्य सेवा में बिपिन रावत को कई वीरता और सेवा पदकों से सम्मानित किया गया! उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल, युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल और परम विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजा गया!
उनके निधन के बाद भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया! लेकिन इन पुरस्कारों से भी बड़ी उनकी पहचान है – एक ऐसे सैनिक की, जिसने सेना के भविष्य को बदलने की दिशा में साहसिक कदम उठाए!
एक अधूरी छलांग, और एक अमर कहानी!
एनडीए के स्विमिंग पूल में एक अधूरी छलांग के कारण सीनियॉरिटी खो देने वाला वह कैडेट आगे चलकर भारतीय सेना का चेहरा बन गया! इतिहास अक्सर ऐसे ही विरोधाभासों से भरा होता है! कभी छोटी सी असफलता जीवन की दिशा बदल देती है, और कभी वही असफलता व्यक्ति को उस ऊंचाई तक पहुंचा देती है जिसकी कल्पना भी उस समय कोई नहीं कर पाता!
जनरल बिपिन रावत की कहानी भी कुछ ऐसी ही है अनुशासन, साहस, निर्णय और राष्ट्रसेवा की कहानी! एक सैनिक की कहानी, जो आज भी भारत की सैन्य स्मृति में जीवित है!!
CDS Bipin Rawat, Indian Army Chief!🫡