21/05/2026
पाकिस्तान इस वक्त चीनी हथियारों पर पूरी तरह निर्भर है. वह फाइटर जेट्स, मिसाइलों और डिफेंस सिस्टम हर एक चीज के लिए चीन पर निर्भर है. रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान अपनी कुल रक्षा खरीद का करीब 80 फीसदी हिस्सा अकेले चीन से खरीदता है.यानी एक तरह से चीन के लिए पाकिस्तान एक सैन्य कॉलोनी बन चुका है. लेकिन, पाकिस्तान को आंख मूंद कर हथियार बेचने के क्रम में चीन ने एक बड़ी गलती कर दी. उसने पाकिस्तान के एक ऐसा एडवांस हथियार दे दिया जिसको वह ठीक से संचालित नहीं कर पाया और उस हथियार का सीक्रेट कोड भारत ने डिकोड कर लिया. इससे चीन ने माथा पकड़ लिया है. वह अब सोचने लगा है कि पाकिस्तान तो 'बंदर के हाथ में उस्तरा' वाला देश है. यानी उसने हथियार दागने में चूक की और अब खामियाजा चीन को भुगतना पड़ेगा.
दरअसल, बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारतीय क्षेत्र में चीनी पीएम-15E एयर टु एयर मिसाइल दागा था. लेकिन, भारत इस मिसाइल को लक्ष्य भेदने से पहले ही मार गिराया था. ऐसे में मिसाइले के मलबे साबूत मिल गए थे.
क्या है पीएल-15ई मिसाइलें
चीन की यह सबसे अहम बीवीआर मिसाइल हैं. यह काफी दूरी से आ रहे खतरनाक खतरे को भांप लेगी और फिर उसे मार गिराएगी. इसका इस्तेमाल पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स में होता है. इसकी गिनती दुनिया के एक सबसे बेहतरीन बीवीआर मिसाइलों में होती है. इसकी रेंज करीब 150 किमी है. यह मैक-5 की स्पीड से दुश्मन की ओर से आ रहे खतरों पर वार करती है. यह मिसाइल फाइटर जेट्स और अन्य बड़े खतरों को आसमान में खत्म करने के लिए इस्तेमाल की जाती है. इसमें 20 से 25 किलो विस्फोटक होता है और मिसाइल का वजन करीब 210 किलो होता है. इसमें दुनिया के सबसे आधुनिक रडार सिस्टम AESA को भी चकमा देने की क्षमता है. यह बीच रास्ते में अपनी राह बदलने में सक्षम है. एक तरह यह लक्ष्य को भेदने के लिए उसके पीछे पड़ जाती है और लक्ष्य जैसे-जैसे अपनी जगह बदलता है वैसे-वैसे यह उसके पीछे जाकर उसका काम तमाम करती है. कुल मिलाकर इस बीवीआर मिसाइल की तकनीक बेहद एडवांस है. इस कारण भारत भी इस मिसाइल को लेकर परेशान था
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