AshthA

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यह पेज भारतीय देवी-देवताओं की मनमोहक तस्वीरें साझा करने के लिए समर्पित है। पवित्र कला, पौराणिक कथाएँ और आध्यात्मिक प्रेरणा के माध्यम से भक्ति की सुंदरता को अनुभव करें। रोज़ाना आशीर्वाद और दिव्य क्षणों के लिए हमें फॉलो करें!

24/08/2026

🔥 क्या आपने कभी ऐसी ज्योति देखी है, जो बिना तेल-बाती के धरती से निकलती हुई जलती रहे? 😱
🙏 हिमाचल के ज्वाला जी मंदिर में सदियों से जलती प्राकृतिक ज्योतियाँ आखिर किस रहस्य की ओर इशारा करती हैं?

कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश में स्थित ज्वाला जी मंदिर माँ ज्वाला को समर्पित एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ माना जाता है। यहाँ गर्भगृह में दिखाई देने वाली प्राकृतिक ज्योतियाँ श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था और दिव्यता का प्रतीक हैं। 🔥

हिंदू मान्यता के अनुसार, यह स्थान देवी सती से जुड़ा हुआ है और यहाँ प्रकट होने वाली ज्वाला को माँ के दिव्य स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। यही धार्मिक विश्वास इस मंदिर को विशेष आध्यात्मिक महत्व देता है। 🕉️

लेकिन रहस्य का दूसरा पहलू भी है… 🔬
वैज्ञानिक दृष्टि से धरती के भीतर से निकलने वाली ज्वलनशील गैसें प्राकृतिक लौ का कारण बन सकती हैं। हालांकि किसी खास ज्योति के स्रोत के बारे में किए जाने वाले हर दावे को प्रमाणित वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जा सकता।

यही वजह है कि ज्वाला जी आज भी आस्था, इतिहास और प्राकृतिक विज्ञान के अद्भुत संगम के रूप में लोगों को आकर्षित करता है।

🔥 आपके अनुसार यह माँ की दिव्य शक्ति है या प्रकृति का अद्भुत रहस्य?
कमेंट में अपनी राय जरूर बताइए और ऐसे ही रहस्यमयी मंदिरों की कहानियों के लिए AshthA को Follow करें। 🙏

जय माँ ज्वाला देवी 🚩🔥

🔱 श्रावण का आखिरी सोमवार — महादेव की भक्ति में डूबने का पावन अवसर 🙏🌿 “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें और अपने मन को भोलेनाथ के ...
24/08/2026

🔱 श्रावण का आखिरी सोमवार — महादेव की भक्ति में डूबने का पावन अवसर 🙏
🌿 “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें और अपने मन को भोलेनाथ के चरणों में समर्पित करें। 🕉️

श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित पवित्र समय माना जाता है। इस पूरे महीने में शिवभक्त श्रद्धा, संयम और भक्ति के साथ महादेव का स्मरण करते हैं। और जब श्रावण का आखिरी सोमवार आता है, तो भक्तों के मन में एक विशेष भाव जागता है—अपने आराध्य के प्रति कृतज्ञता, प्रेम और समर्पण का। 🔱🌺

महादेव हमें सिखाते हैं कि जीवन में परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, हमें धैर्य और विश्वास का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। शिव का स्वरूप स्वयं त्याग, तपस्या, करुणा और संतुलन का प्रतीक है। उनके मस्तक पर चंद्रमा शीतलता का संदेश देता है, गले का सर्प निर्भयता की याद दिलाता है और उनकी जटाओं से बहती माँ गंगा पवित्रता का प्रतीक मानी जाती हैं। 🌊🕉️

आज इस पावन सोमवार पर कुछ क्षण अपने मन को शांत करें। आँखें बंद करके श्रद्धा से “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें। अपने परिवार, प्रियजनों और समस्त जीवों के सुख-शांति की प्रार्थना करें। महादेव से केवल अपनी इच्छाएँ ही नहीं, बल्कि सही मार्ग पर चलने की शक्ति भी माँगें। 🙏

कहा जाता है कि सच्ची भक्ति केवल मंदिर तक सीमित नहीं होती। किसी जरूरतमंद की सहायता करना, किसी दुखी व्यक्ति को सांत्वना देना, माता-पिता का सम्मान करना और अपने कर्मों में ईमानदारी रखना भी शिव-भक्ति का सुंदर रूप है। ❤️

इस आखिरी सोमवार पर अपने भीतर से अहंकार, क्रोध और नकारात्मकता को त्यागने का संकल्प लें और महादेव के गुणों—शांति, करुणा, धैर्य और सत्य—को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। 🌿

🔱 हर हर महादेव!
🕉️ ॐ नमः शिवाय।
🙏 भोलेनाथ की कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे।

अगर आपके हृदय में महादेव बसते हैं, तो कमेंट में लिखें — “हर हर महादेव 🔱” और इस भक्ति संदेश को अपने शिवभक्त मित्रों एवं परिवार के साथ साझा करें। 🌺

#हरहरमहादेव #ॐनमःशिवाय #भोलेनाथ #श्रावणमास #शिवभक्ति

23/08/2026

🔥 इस रहस्य के पीछे छिपी है एक ऐसी पुराणिक कथा, जो भक्ति और चेतना का गहरा संदेश देती है। शिव पुराण से जुड़ी परंपरा में वर्णित इस प्रसंग में महादेव गहन समाधि में लीन थे। देवताओं के सामने एक महत्वपूर्ण उद्देश्य था, लेकिन शिव की समाधि भंग करना असंभव था। तब कामदेव ने अपने पुष्प-बाण से महादेव की समाधि को प्रभावित करने का प्रयास किया।
क्षण भर में वातावरण बदल गया…
महादेव की आँखें खुलीं और उनके मस्तक पर स्थित तीसरा नेत्र प्रकट हुआ। उस दिव्य अग्नि में कामदेव का देह-रूप भस्म हो गया। 🔥
लेकिन इस कथा का रहस्य केवल विनाश में नहीं है।
तीसरा नेत्र भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में अंतरदृष्टि, जागृति और अज्ञान के अंत का प्रतीक भी माना जाता है। यह हमें याद दिलाता है कि बाहरी संसार को देखने वाली आँखों से आगे भी एक ऐसी चेतना है, जो सत्य को भीतर से पहचानती है।
महादेव का तीसरा नेत्र इसलिए केवल शक्ति का प्रतीक नहीं—यह मोह, अहंकार और अज्ञान से ऊपर उठने का संदेश भी देता है।
🔱 जब भीतर की चेतना जागती है, तब अंधकार स्वयं समाप्त होने लगता है।
🙏 हर हर महादेव!
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🌞 सूर्यदेव को जल अर्पित करने की सरल विधि 🕉️सुबह सूर्योदय के समय स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। एक तांबे के लोटे में स्व...
23/08/2026

🌞 सूर्यदेव को जल अर्पित करने की सरल विधि 🕉️

सुबह सूर्योदय के समय स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। एक तांबे के लोटे में स्वच्छ जल लें और सूर्य की ओर मुख करके धीरे-धीरे जल अर्पित करें। जल अर्पित करते समय मन को शांत रखें और श्रद्धापूर्वक सूर्यदेव का स्मरण करें। 🙏🌅

📿 मंत्र:
ॐ सूर्याय नमः।

✨ मंत्र का सरल अर्थ:
“मैं प्रकाश और ऊर्जा के स्वरूप सूर्यदेव को नमन करता/करती हूँ।”

🌺 कब करें?
सूर्योदय के समय जल अर्पित करना पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है। नियमित रूप से श्रद्धा और सकारात्मक भाव से सूर्यदेव का स्मरण करें।

💛 एक सुंदर संकल्प:
“हे सूर्यदेव, मेरे जीवन में प्रकाश, ऊर्जा, आत्मविश्वास और सद्बुद्धि बनाए रखें।”

🚩 ॐ सूर्याय नमः। जय सूर्यदेव! 🙏

#सूर्यदेव #सूर्यपूजा #सनातनधर्म #भक्ति #आध्यात्मिकता

21/08/2026

🔥 एक ऐसा दरवाज़ा… जिसके पीछे छिपा रहस्य आज भी लोगों की जिज्ञासा बढ़ाता है! 😱
🔐 पद्मनाभस्वामी मंदिर की रहस्यमयी Vault B—आखिर इसके बारे में इतनी चर्चाएँ क्यों होती हैं?

केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और रहस्यमयी मंदिरों में से एक है। भगवान विष्णु को समर्पित यह प्राचीन मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला, धार्मिक परंपराओं और सदियों पुराने इतिहास के लिए जाना जाता है। 🙏

मंदिर के भूमिगत कक्षों में मौजूद Vault B ने लंबे समय से लोगों की कल्पना और जिज्ञासा को आकर्षित किया है। इसके बारे में खजाने, प्राचीन वस्तुओं और रहस्यमयी घटनाओं से जुड़ी अनेक कहानियाँ और लोकमान्यताएँ प्रचलित हैं। लेकिन ध्यान रखें—इंटरनेट पर कही जाने वाली हर कहानी ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित नहीं है।

यही इसे और दिलचस्प बनाता है—जहाँ आस्था अपनी जगह है, वहीं इतिहास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथ्यों और प्रमाणों की तलाश करते हैं। 🕉️🔬

क्या इस रहस्यमयी कक्ष के पीछे कोई अनोखी ऐतिहासिक कहानी है? या फिर समय के साथ इससे जुड़ी मान्यताओं ने इसे रहस्य बना दिया?

👇 आपकी क्या राय है?
अगर आपको लगता है कि इस रहस्य की पूरी कहानी सामने आनी चाहिए, तो कमेंट में लिखें “ॐ नमो नारायणाय” 🙏 और इस Reel को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसे भारत के रहस्यमयी मंदिरों के बारे में जानना पसंद है।

Follow करें — ऐसी ही अनसुनी मंदिर कथाओं, इतिहास और रहस्यों के लिए! 🚩

जब नारायण ने स्वयं बदली सृष्टि की दिशाउस दिन सृष्टि में कुछ ऐसा होने वाला था, जिसका निर्णय देवता भी नहीं कर सकते थे।और त...
20/08/2026

जब नारायण ने स्वयं बदली सृष्टि की दिशा

उस दिन सृष्टि में कुछ ऐसा होने वाला था, जिसका निर्णय देवता भी नहीं कर सकते थे।
और तभी… स्वयं नारायण ने ऐसा कदम उठाया, जिसने तीनों लोकों की दिशा बदल दी।

कल्पना कीजिए…

चारों ओर शांति थी।
क्षीरसागर की अनंत लहरों पर भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर विराजमान थे। लक्ष्मी जी उनके चरणों के समीप थीं और सृष्टि अपने नियत क्रम में चल रही थी।

लेकिन उस शांति के पीछे एक अदृश्य हलचल जन्म ले चुकी थी।

धरती पर अधर्म धीरे-धीरे बढ़ रहा था। शक्तिशाली लोग अपनी शक्ति का उपयोग धर्म की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि अपने अहंकार को बढ़ाने के लिए कर रहे थे।

ऋषियों की तपस्या भंग हो रही थी।
निर्दोष प्राणी भय में जी रहे थे।
और सबसे बड़ा प्रश्न यह था—

क्या धर्म को बचाने के लिए स्वयं नारायण को हस्तक्षेप करना पड़ेगा?

देवताओं ने भगवान विष्णु की ओर देखा।

लेकिन नारायण शांत थे।

उनके चेहरे पर न क्रोध था, न चिंता।

बस एक गहरी मुस्कान।

क्योंकि भगवान जानते थे—

जब अधर्म अपनी सीमा पार करता है, तब परिवर्तन निश्चित हो जाता है।

नारायण ने अपनी आंखें खोलीं।

क्षीरसागर की लहरें जैसे अचानक थम गईं।

देवताओं को लगा मानो समय स्वयं कुछ क्षणों के लिए रुक गया हो।

भगवान विष्णु ने कहा—

“सृष्टि का नियम केवल शक्ति से नहीं चलता… धर्म और संतुलन से चलता है।”

और फिर उन्होंने अपना संकल्प लिया।

यह किसी एक व्यक्ति के विनाश का संकल्प नहीं था।

यह था—

संतुलन को वापस लाने का संकल्प।

नारायण ने समझ लिया था कि इस बार केवल उपदेश पर्याप्त नहीं होगा।
सृष्टि को एक ऐसी शक्ति की आवश्यकता थी जो अधर्म के सामने खड़ी हो सके।

और तभी भगवान ने अपने दिव्य स्वरूप से एक नई लीला की भूमिका रची।

समय आगे बढ़ा…

परिस्थितियां बदलीं…

और जब संसार को लगा कि अब धर्म की कोई आशा नहीं बची, तभी नारायण ने अपना अवतार धारण किया।

अंधकार के बीच प्रकाश प्रकट हुआ।

जहाँ भय था, वहाँ साहस आया।

जहाँ अहंकार था, वहाँ धर्म ने चुनौती दी।

और जहाँ लोगों को लगा था कि भगवान उनसे दूर हैं…

वहीं उन्हें समझ आया कि—

नारायण कभी दूर नहीं होते।

वे केवल प्रतीक्षा करते हैं।

उस क्षण की…

जब मनुष्य स्वयं अपनी सीमाएं पार कर देता है।

क्योंकि भगवान हर बार तुरंत हस्तक्षेप नहीं करते।

कभी-कभी वे हमें संघर्ष करने देते हैं, ताकि हम अपने भीतर की शक्ति पहचान सकें।

लेकिन जब धर्म की अंतिम सीमा भी टूटने लगे…

तब नारायण स्वयं सृष्टि की दिशा बदल देते हैं।

यही इस कथा का सबसे बड़ा संदेश है—

ईश्वर की लीला हमेशा हमारी इच्छा के अनुसार नहीं चलती, लेकिन उसका उद्देश्य सृष्टि में संतुलन स्थापित करना होता है।

और शायद इसी कारण भारतीय परंपरा में भगवान विष्णु को केवल पालनकर्ता नहीं, बल्कि धर्म और cosmic संतुलन के रक्षक के रूप में देखा जाता है।

🙏 जय श्री हरि।
जय श्री नारायण।

अगर आपको ऐसी ही रहस्यमयी और भावपूर्ण भगवान विष्णु की कथाएँ पसंद हैं, तो इस कहानी को आगे साझा करें—शायद किसी और भक्त तक भी नारायण का संदेश पहुँच जाए।




🌺 जब भगवान गणेश ने अपने माता-पिता की परिक्रमा की… 🌺एक बार कैलाश पर्वत पर भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने दोनों पुत्रों...
19/08/2026

🌺 जब भगवान गणेश ने अपने माता-पिता की परिक्रमा की… 🌺

एक बार कैलाश पर्वत पर भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने दोनों पुत्रों—गणेश जी और कार्तिकेय जी—से कहा,

“जो भी इस संसार की सबसे पहले परिक्रमा करके वापस आएगा, वही विजेता होगा।”

कार्तिकेय जी तुरंत अपने वाहन मोर पर सवार होकर पूरे संसार की यात्रा पर निकल पड़े। 🌍

लेकिन गणेश जी का वाहन था छोटा-सा मूषक। वे जानते थे कि संसार की परिक्रमा करना उनके लिए आसान नहीं होगा।

उन्होंने कुछ क्षण आँखें बंद कीं… और फिर अपने माता-पिता के चारों ओर तीन बार परिक्रमा कर ली। 🙏

भगवान शिव और माता पार्वती ने आश्चर्य से पूछा—

“गणेश, तुमने संसार की परिक्रमा कैसे पूरी कर ली?”

गणेश जी ने विनम्रता से कहा—

“मेरे लिए मेरे माता-पिता ही पूरा संसार हैं।” ❤️

यह सुनकर माता पार्वती और भगवान शिव भाव-विभोर हो गए और गणेश जी को विजेता घोषित किया।

🌼 इस कथा की सीख:
जिस हृदय में माता-पिता के प्रति सम्मान और प्रेम होता है, वहाँ स्वयं भगवान का आशीर्वाद रहता है।

कभी-कभी जीवन में बड़ी-बड़ी यात्राएँ करने से अधिक महत्वपूर्ण होता है यह समझना कि हमारे लिए वास्तव में सबसे मूल्यवान क्या है।

🙏 जय श्री गणेश!
🌺 गणपति बप्पा मोरया! 🌺

अगर आप भी अपने माता-पिता को अपने जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद मानते हैं, तो ❤️ लिखकर उनका सम्मान करें।

🚩 जय बजरंगबली 🚩🙏 जहाँ भक्ति सच्ची होती है, वहाँ बजरंगबली की कृपा अवश्य होती है।“हे बजरंगबली! हमें शक्ति दो, साहस दो और स...
18/08/2026

🚩 जय बजरंगबली 🚩

🙏 जहाँ भक्ति सच्ची होती है, वहाँ बजरंगबली की कृपा अवश्य होती है।

“हे बजरंगबली! हमें शक्ति दो, साहस दो और सदैव अपने भक्तों की रक्षा करो।”

🚩 जय श्री राम • जय हनुमान 🚩

❤️ अगर आप भी बजरंगबली के भक्त हैं, तो कमेंट में लिखें — “जय बजरंगबली”
🙏 पोस्ट को Like और Share करके भक्ति का प्रकाश फैलाएँ।

#जयबजरंगबली #जयहनुमान #जयश्रीराम

16/08/2026

कोणार्क के पत्थरों में छिपा है सूर्य उपासना का एक अद्भुत रहस्य… ☀️🛕
जिस सूर्य को हम रोज़ अर्घ्य देते हैं, उसी दिव्य शक्ति को एक विशाल रथ के रूप में पत्थरों में उतार दिया गया।
क्या आप जानते थे इस परंपरा के पीछे की कहानी? 👀🙏




13/08/2026

🙏 जहाँ नारायण हैं, वहाँ धर्म है… और जहाँ माँ लक्ष्मी हैं, वहाँ मंगल और समृद्धि का प्रकाश है। ✨
हे लक्ष्मी-नारायण, हमारे जीवन में शांति, भक्ति और सद्बुद्धि का प्रकाश बनाए रखें। 🪷
ॐ श्री लक्ष्मी नारायणाय नमः। 🙏
जय श्री लक्ष्मी नारायण ❤️




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