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अगर इच्छा प्रबल हो तो मंजिल दूर नहीं,✍️✍️.

मरुधरा की इस तपती हुई धरती पर, जहाँ दूर-दूर तक रेत ही रेत दिखाई देती है, वहाँ खेजड़ी का पेड़ किसी वरदान से कम नहीं। यह क...
14/07/2026

मरुधरा की इस तपती हुई धरती पर, जहाँ दूर-दूर तक रेत ही रेत दिखाई देती है, वहाँ खेजड़ी का पेड़ किसी वरदान से कम नहीं। यह केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि अनगिनत जीवों की साँस, किसानों की उम्मीद और पशुपालकों का सबसे बड़ा सहारा है। जब खेत सूने हो जाते हैं, घास खत्म होने लगती है और धरती की हरियाली कहीं खो जाती है, तब यही खेजड़ी अपनी हर पत्ती से जीवन बाँटती है। आज भी गाँवों में यह परंपरा जीवित है। किसान बड़े प्रेम और समझदारी से खेजड़ी की कुछ टहनियाँ काटता है, ताकि नीचे खड़ी बकरियाँ और भेड़ें भरपेट चारा खा सकें। यह किसी पेड़ को नुकसान पहुँचाने की कहानी नहीं, बल्कि इंसान, पशु और प्रकृति के बीच सदियों पुराने विश्वास की कहानी है। खेजड़ी फिर से नई शाखाएँ निकाल लेती है, और हर साल उसी अपनापन के साथ जीवन देती रहती है। नीचे खड़ी ये मासूम बकरियाँ नहीं जानतीं कि उनके लिए कोई पेड़ अपनी शाखाएँ झुका रहा है। वे तो बस प्रकृति का दिया हुआ प्यार चुपचाप स्वीकार कर रही हैं। उनकी मासूमियत हमें सिखाती है कि जीवन की सबसे बड़ी खुशी दिखावे में नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ मिलकर जीने में है। जिस धरती पर खेजड़ी खड़ी रहती है, वहाँ उम्मीद कभी खत्म नहीं होती। यह पेड़ गर्मी में छाया देता है, सूखे में चारा देता है, मिट्टी को बचाता है और अनगिनत पक्षियों व जीवों का घर बनता है। इसलिए हमारे बुज़ुर्ग इसे केवल पेड़ नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य मानते थे।🐐🌿

दोस्तों, मेरा पेज thar_real_story सिर्फ़ एक सोशल मीडिया अकाउंट नहीं है, बल्कि यह हमारे गाँव, हमारी मिट्टी, हमारी संस्कृत...
14/07/2026

दोस्तों, मेरा पेज thar_real_story सिर्फ़ एक सोशल मीडिया अकाउंट नहीं है, बल्कि यह हमारे गाँव, हमारी मिट्टी, हमारी संस्कृति और हमारी परम्पराओं की पहचान है। यह पेज उन लोगों के लिए है जो आज भी गाँव की सादगी, अपनापन, लोक संस्कृति, पशु-पक्षियों, खेत-खलिहानों और थार की अनमोल विरासत से प्यार करते हैं। आज की दुनिया तेज़ी से बदल रही है। गाँव की पुरानी परम्पराएँ, लोकगीत, रीति-रिवाज, बुज़ुर्गों की बातें, प्रकृति से जुड़ा जीवन और हमारी सांस्कृतिक धरोहर धीरे-धीरे कहीं खोती जा रही है। इसी सोच के साथ मैंने thar_real_story की शुरुआत की, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी जान सकें कि हमारे गाँवों की असली पहचान क्या है और थार की मिट्टी कितनी अनमोल है।
इस पेज पर आपको सिर्फ़ फोटो या वीडियो नहीं मिलेंगे, बल्कि हर पोस्ट के पीछे एक कहानी, एक भावना और अपनी मिट्टी के प्रति सम्मान मिलेगा। कभी गाँव की गलियों की झलक, कभी रेत के धोरों की खूबसूरती, कभी पशु-पक्षियों का जीवन, कभी किसानों की मेहनत, तो कभी हमारी संस्कृति और परम्पराओं की सच्ची तस्वीर देखने को मिलेगी। मैं चाहता हूँ कि दुनिया हमारे गाँव को सिर्फ़ नक्शे पर नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति, सादगी और इंसानियत से पहचाने। अगर हमारी छोटी-सी कोशिश आपको पसंद आती है, तो बस इतना साथ देते रहिए कि यह सफर कभी रुके नहीं। आपका एक फ़ॉलो, एक लाइक, एक कमेंट और एक शेयर हमारे लिए बहुत बड़ी ताकत है। आपका प्यार और विश्वास ही हमें हर दिन कुछ नया और बेहतर करने की प्रेरणा देता है। अगर आप भी अपनी मिट्टी से प्यार करते हैं, गाँव की परम्पराओं का सम्मान करते हैं और चाहते हैं कि हमारी सांस्कृतिक विरासत हमेशा जीवित रहे, तो thar_real_story परिवार का हिस्सा बनिए और इस पेज को अपने दोस्तों और परिवार के साथ भी ज़रूर साझा कीजिए। आइए, मिलकर अपनी संस्कृति को बचाएँ, अपनी परम्पराओं को आगे बढ़ाएँ और थार की असली कहानियों को दुनिया तक पहुँचाएँ। यही हमारी पहचान है, यही हमारा गर्व है और यही हमारा उद्देश्य है। दिल से धन्यवाद उन सभी साथियों का, जिन्होंने शुरुआत से आज तक मेरा साथ दिया। आपका प्यार ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। आगे भी इसी तरह अपना आशीर्वाद और सपोर्ट बनाए रखिए। ❤️🙏thar_real_story थार की असली कहानी • गाँव की संस्कृति • अपनी मिट्टी की पहचान" 🌾📸🤍

14/07/2026

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thar ki tapti ret par jab suraj aag barsata hai,dharti ka har ek kan pani ki aas lagata hai.dur-dur tak na koi nadi, na ...
12/07/2026

thar ki tapti ret par jab suraj aag barsata hai,
dharti ka har ek kan pani ki aas lagata hai.
dur-dur tak na koi nadi, na koi bahta jharna,
bas ret ke samandar mein jeevan ko har roz hai ladna. yahan pani koi sadharan cheez nahin,
yah to har sans ki sabse badi ummeed hai. har boond mein ek zindagi basati hai, har jalkund mein prakriti ki ek nai tasveer dikhti hai. dekho is shant khadi gaay ko, ne koi shikayat, na koi aawaz. bas ek chhote se jalkund ke paas aakar apni pyas bujhane ki ek masoom-si aas. shayd kai kilometer ka safar tay karke aai hogi, tapati dharti par apne kadam jalaye honge. fir kahin jaakar yah chhoti-si pani ki boond mili hogi, jisne iski bujhti ummeedon mein phir se jaan bhari hogi. thar hamen sikhata hai ki jivan bade sadhanon se nahin chalta, kabhi-kabhi ek chhoti-si boond bhi puri duniya se badhkar lagti hai. jo jalkund hamen chhota dikhai deta hai, vahi kisi bejuban ki puri duniya hota hai.
vahin uski pyas bujhti hai, vahin uski zindagi muskurati hai. aao doston, ham bhi is dharti ka thoda-sa karz chukaen. apne kheton, oranon aur jangalon men chhote-chhote jalkund banvaen.
kyonki jab insaan kisi pyase bejuban ke liye
ek boond pani chhod jata hai, tab wah keval pani nahin deta, balki insaniyat ki sabse sundar misaal ban jata hai. thar ki ret yahi kehti hai ped lagao, pani bachao, jalkund bharte jao. bejubanon ki pyas bujhao, dharti maa ka rin chukao." kyonki thar mein pani sirf pani nahin hota, vah har bejuban ki zindgi, har kisan ki ummeed aur prakriti ki dhadkan hota hai. 🌿💧🐄

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