19/01/2023
जनशताब्दी एक्सप्रेस सोमवार को जब हावड़ा से पटना के चली तो उस गर्भवती महिला को अंदाज न था...
देर रात जब ट्रेन जसीडीह पहुंची, जसीडीह से खुली तब इस महिला को प्रसव पीड़ा महसूस हुई.. ए सी में सफर करने वाली तथाकथित बड़े घर की महिलाओं ने इस दर्द से छटपटाती गर्भवती की सहायता के लिए आगे नहीं आई।
हिजड़ा, जिसके नाम सुनते ही ट्रेन में सफर करने वाले लोग एक निश्चित दूरी बना लेते हैं, वो हिजड़ा जो तालियां पीट कर पांच दस रुपए मांगने का काम करतें हैं,इन हिजड़ों के समूह ने ऐसा काम किया कि लोग तालियां बजा सकते हैं।
उस पिड़ित महिला को सफलता पूर्वक प्रसव करवाया, बच्चे का नाल काटा,उसके बदन को अपने कपड़ों से पोंछा और तो और उन्होने उस बच्चे के पिता से जब यह पूछा कि आपके पास पैसे है? पटना उतर कर इस बच्चे और उसकी मां को डाक्टर से दिखवाने के? नवजात का पिता बोलता है कि हां है,तो इनमें से एक हिजड़ा ५०१ निकाल कर उस बच्चे के हांथ में थमा देता है और पीछे से एक हिजड़ा जब यह बोलता है कि हम पैसे तो रोज कमाते हैं एक दिन दुआ कमा लेंगे तो हम धनवान हो जाएंगे शायद?और सभी मिल कर उस बच्चे को डाक्टर बनने की दुआएं देते है।
और हां उस बोगी में सफर करने वाली हर महिलाओं को लानते देना वो न भूलें थे😊