30/05/2022
सुन्नी_मुसलमानों_होश_में_आओ
एक दम सिंपल तरीके से समझाता हु , पोस्ट को गौर से पढ़ना !
⭐आज कुछ लोग कहते है हम सब मुसलमान है एक दूसरे को बुरा ना कहो , सब अल्लाह को मानने वाले है , सब नमाज़ , कलमा पढ़ने वाले है ! मैं पूछता हूं कि सब नमाज़ , कलमा पढ़ने वाले है अल्लाह को अल्लाह कहने वाले है , तो हुजूर की उस हदीस का क्या मतलब है जिसमे सरकार ने फरमाया की ..........
🌴हदीस :- ""बनी इस्राइल में 72 फिरके हुए मेरी उम्मत में 73 फिरके होंगे उसमे से 72 जहन्नमी होंगे और सिर्फ 1 ही फिरका जन्नत में जायेगा ""
📚( हवाला : मिश्कात शरीफ : जिल्द न 1 , सफा न 52 / तिमिर्जी शरीफ , जिल्द न 2 , सफा न 89 )
अब जो लोग कहते है हम सब मुसलमान है हमको एक होकर रहना है , वो लोग इस हदीस का जवाब दे ? क्या दो तलवारे एक म्यान में रह सकती है ? क्या हक़ और बातिल एक हो सकते है ?? अरे नादानों नमाज़ पढ़ने का नाम इस्लाम नही है , अगर तुमलोगो ने नमाज़ और कलमा पढ़ने को इस्लाम जाना है तो यज़ीद भी नमाज़ पढता था ! वो भी कलमा पढता था , वो भी अल्लाह को अल्लाह और रसूल को रसूल कहता था , अगर आप के हिसाब से चले तो कर्बला की जंग ही नही होती ! इस्लाम हक़ और बातिल का फर्क बताता है , इस्लाम हक्कानियत की पहचान है !
आईये अब फिरको की हिस्ट्री देखते है ..........
जो लोग हम सुन्नी बरेलवियों को मुशरिक , कबर पुजवा इत्यादि कहते है वो लोग अपने फिरके की पैदाइश बता दे ?? हम अहले सुन्नत व जमात 1400 सालो से चलते आ रहे है , जब देवबंदियों ने भी खुद को सुन्नी हनफ़ी , अहले सुन्नत वल जमात कहना शुरू किया तो असली सुन्नियो की पहचान के लिए हमको उसमे तब्दीली करनी पड़ी और उसका नाम मसलके आला हजरत रख दिया ! ये कोई नया मसलक नही है बल्कि ये वही इमाम अबू हनीफा का हनफ़ी मसलक है ! कोई अपने बाप की हलाली औलाद है तो साबित करे कि आला हजरत का अक़ीदा इमाम अबु हनीफा के अक़ीदे से हट के है , गौसो , ख्वाजा के अक़ीदे से हट के है या अलग है !
अँगरेज़ विक्टोरियन की औलाद वहाबी , देवबन्दी , अहले हदीस सिर्फ अपनी पैदाइश बता दे , जाहिल गुस्ताखो 1857 से पहले जितने भी लोग इस दुनिया से रुक्सत हुए क्या वो सब मुशरिक थे ?? ( माजल्लाह ) अरे वहाबी देवबंदियों , तब्लीगीयो जब इमरजेंसी का दौर था नसबंदी का फैसला लिया गया उस वक़्त देवबन्दी उलमाओ ने नसबंदी को जायज़ कहा ! जब बरेली के ताजदार मुफ्तिये आज़म हिन्द ने नसबंदी को हराम कहा उसपर हराम का फतवा दिया , तब जाकर तुम जैसे हरामी पैदा हुए... नही तो तुम्हारे उलमा ने तो नसबंदी जायज़ है कहा था ! सालो ऐहसान फ़रामोशो तुम लोगो की ज़िंदगी भी बरेलवी उलेमाओ की दी हुई भीख है !
वहाबी , देवबन्दी , तब्लीगी , अहले हदीस इत्यादि फिरके नए बने हुए है जिनकी पैदाइश 150 से 160 सालो में हुए है ! फिरके बनाये तुम लोगो ने और फिरका परस्ती का लेबल हमपर लगाते हो मक्कारो ?? अपनी असल का पता नही और दूसरों में ऐब ढूंढते हो !
अब मुझे बताओ जाहिलो तुमसे 1200 साल पहले जितने भी लोग आये क्या वो जन्नती नही है ? क्या वो लोग भी शिर्क और बिदअत करते थे ?
तुमलोगो के पैदा होने से पहले जन्नत के दरवाज़े बंद थे क्या ? तुमलोगो के पैदा होने से पहले कोई जन्नती नही था क्या ? अरे जाहिलो तुम लोग सुन्नी बरेलवियों को नही अहले सुन्नत वल जमात पे ऐतराज़ कर रहे हो , नबी , सहाबा , ताबेईन , तबेताबेईन , सिद्दीकीन , शोहदा , सालेहीन , सरकार ए गौसे आज़म , ख्वाजा गरीब नवाज , हजरत निजामुदीन , हजरत अशरफ सिमनानी , बाबा फरीद , वारिस ए पाक , साबिर पिया , मीरा दाता , हाजी अली , इन सब की जमात पर ऐतराज़ कर रहे हो !
( अपने फिरको की हिस्ट्री देखो जाहिलो एक से बढ़कर एक गुस्ताखी भरी इबारतें लिखी है तुमलोगो के उलेमाओ ने पता नही तो मुजसे पूछो )
नबी ए पाक की हदीस:
"🌴 हुजूर ने फ़रमाया की मुझे अल्लाह की कसम मुझे मेरे बाद तुम्हारे शिर्क में मुबतला होने का कोई खौफ नही है "( उम्मत शिर्क नही कर सकती )
📚( हवाला : सही बुखारी )
जब नबी कह रहे है कि मेरी उम्मत शिर्क नही कर सकती तो फिर तुम लोग दीन के ठेकेदार क्यों बन रहे हो ? हम नबी की माने या तुम जाहिलो गुस्ताख लोगो की माने ?
🌴ख्वाजा गरीब नवाज रहमतुल्लाहि दाता अली हजवेरी की मज़ार पर जाते है , वहाँ चिल्ला करते है , ये कौन गरीब नवाज है ? ये वही गरीब नवाज है जिन्होंने 90 लाख हिंदुओं को मुसलमान बनाये , और तुमलोग शिर्क और बिदअत के नाम पर मुसलमानों को काफिर बनाते हो ! अरे जाहिलो.. जो क़ब्रो पर जाने वाले 90 लाख लोगो को कलमा पढ़ाते है , और तुम क़ब्रो के मुनकिऱो तुम्हारे अकाबिरिन ने कितनो को कलमा पढ़ाया बताओ ?
तुम तो मुसलमानों को मुशरिक कहते हो, वो तो मुशरिक को मुसलमान बनाते थे !