08/08/2025
"कच्ची उम्र में सजी साड़ियों के पीछे छुपे अधूरे सपने..."
आज जिन चेहरों पर मुस्कान होनी चाहिए थी खेल और किताबों की वजह से, वहाँ झलक रही है ज़िम्मेदारियों की थकावट। सजी-धजी इन छोटी बच्चियों को समाज ने 'बहू' का दर्जा तो दे दिया, लेकिन बचपन छीन लिया।
यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं, एक सच्चाई है उन हज़ारों लड़कियों की जिन्हें कम उम्र में विवाह का बोझ उठाना पड़ता है। जब दुनिया उन्हें पंख देना भूल जाती है और उड़ान से पहले ही उनकी उड़ान काट दी जाती है।
समय आ गया है कि हम यह सोचें — क्या हम अपने भविष्य की नींव को यूँ ही समय से पहले शादी के बोझ तले दबा देंगे?
हर बच्ची का हक़ है कि वह अपने सपनों को पूरा करे, शिक्षा पाए, और तब निर्णय ले जब वह खुद इसके लिए तैयार हो।