Krishan ballabh Narayan singh

Krishan ballabh Narayan singh product details job

Happy birthday
01/08/2022

Happy birthday

Jamui Bihar
31/07/2022

Jamui Bihar

31/07/2022
विष्णु पथ धाम
31/07/2022

विष्णु पथ धाम

खो गई वो...चिट्ठियाँ...जिनमे लिखने के सलीके छुपे होते थेकुशलता की कामना से शुरू होते थेबड़ों के चरणस्पर्श पर ख़त्म होते ...
31/07/2022

खो गई वो...

चिट्ठियाँ...
जिनमे लिखने के सलीके छुपे होते थे
कुशलता की कामना से शुरू होते थे
बड़ों के चरणस्पर्श पर ख़त्म होते थे!

और बीच में लिखी होती थी जिंदगी...

नन्हें के आने की खबर
मां की तबियत का दर्दं
और पैसे भेजने का अनुनय
फसलों के खराब होने की वजह!

कितना कुछ सिमट जाता था
एक नीले से कागज में....

जिसे नवयौवना भाग कर सीने से लगाती
और अकेले में आंखों से आंसू बहाती!

मां की आस थी
पिता का संबल थी
बच्चों का भविष्य थी
और गांव का गौरव थी ये चिट्ठियाँ!

डाकिया चिट्ठी लाएगा
कोई बांच कर सुनाएगा
देख देख चिट्ठी को
कई कई बार छू कर चिट्टी को
अनपढ़ भी
एहसासों को पढ़ लेते थे!

अब तो स्क्रीन पर अंगूठा दौड़ता है
और अक्सर ही दिल तोड़ता हैं
मोबाइल का स्पेस भर जाए तो
सब कुछ दो मिनिट में डिलीट होता है!

सब कुछ सिमट गया छै इंच में
जैसे मकान सिमट गए फ्लैटों में
जज्बात सिमट गए मैसेजों में
चूल्हे सिमट गए गैसों में,

और इंसान सिमट गए पैसों में . ❤️

खो गई वो...चिट्ठियाँ...जिनमे लिखने के सलीके छुपे होते थेकुशलता की कामना से शुरू होते थेबड़ों के चरणस्पर्श पर ख़त्म होते ...
31/07/2022

खो गई वो...

चिट्ठियाँ...
जिनमे लिखने के सलीके छुपे होते थे
कुशलता की कामना से शुरू होते थे
बड़ों के चरणस्पर्श पर ख़त्म होते थे!

और बीच में लिखी होती थी जिंदगी...

नन्हें के आने की खबर
मां की तबियत का दर्दं
और पैसे भेजने का अनुनय
फसलों के खराब होने की वजह!

कितना कुछ सिमट जाता था
एक नीले से कागज में....

जिसे नवयौवना भाग कर सीने से लगाती
और अकेले में आंखों से आंसू बहाती!

मां की आस थी
पिता का संबल थी
बच्चों का भविष्य थी
और गांव का गौरव थी ये चिट्ठियाँ!

डाकिया चिट्ठी लाएगा
कोई बांच कर सुनाएगा
देख देख चिट्ठी को
कई कई बार छू कर चिट्टी को
अनपढ़ भी
एहसासों को पढ़ लेते थे!

अब तो स्क्रीन पर अंगूठा दौड़ता है
और अक्सर ही दिल तोड़ता हैं
मोबाइल का स्पेस भर जाए तो
सब कुछ दो मिनिट में डिलीट होता है!

सब कुछ सिमट गया छै इंच में
जैसे मकान सिमट गए फ्लैटों में
जज्बात सिमट गए मैसेजों में
चूल्हे सिमट गए गैसों में,

और इंसान सिमट गए पैसों में . ❤️

खो गई वो...चिट्ठियाँ...जिनमे लिखने के सलीके छुपे होते थेकुशलता की कामना से शुरू होते थेबड़ों के चरणस्पर्श पर ख़त्म होते ...
31/07/2022

खो गई वो...

चिट्ठियाँ...
जिनमे लिखने के सलीके छुपे होते थे
कुशलता की कामना से शुरू होते थे
बड़ों के चरणस्पर्श पर ख़त्म होते थे!

और बीच में लिखी होती थी जिंदगी...

नन्हें के आने की खबर
मां की तबियत का दर्दं
और पैसे भेजने का अनुनय
फसलों के खराब होने की वजह!

कितना कुछ सिमट जाता था
एक नीले से कागज में....

जिसे नवयौवना भाग कर सीने से लगाती
और अकेले में आंखों से आंसू बहाती!

मां की आस थी
पिता का संबल थी
बच्चों का भविष्य थी
और गांव का गौरव थी ये चिट्ठियाँ!

डाकिया चिट्ठी लाएगा
कोई बांच कर सुनाएगा
देख देख चिट्ठी को
कई कई बार छू कर चिट्टी को
अनपढ़ भी
एहसासों को पढ़ लेते थे!

अब तो स्क्रीन पर अंगूठा दौड़ता है
और अक्सर ही दिल तोड़ता हैं
मोबाइल का स्पेस भर जाए तो
सब कुछ दो मिनिट में डिलीट होता है!

सब कुछ सिमट गया छै इंच में
जैसे मकान सिमट गए फ्लैटों में
जज्बात सिमट गए मैसेजों में
चूल्हे सिमट गए गैसों में,

और इंसान सिमट गए पैसों में . ❤️ 1976

खो गई वो...चिट्ठियाँ...जिनमे लिखने के सलीके छुपे होते थेकुशलता की कामना से शुरू होते थेबड़ों के चरणस्पर्श पर ख़त्म होते ...
31/07/2022

खो गई वो...

चिट्ठियाँ...
जिनमे लिखने के सलीके छुपे होते थे
कुशलता की कामना से शुरू होते थे
बड़ों के चरणस्पर्श पर ख़त्म होते थे!

और बीच में लिखी होती थी जिंदगी...

नन्हें के आने की खबर
मां की तबियत का दर्दं
और पैसे भेजने का अनुनय
फसलों के खराब होने की वजह!

कितना कुछ सिमट जाता था
एक नीले से कागज में....

जिसे नवयौवना भाग कर सीने से लगाती
और अकेले में आंखों से आंसू बहाती!

मां की आस थी
पिता का संबल थी
बच्चों का भविष्य थी
और गांव का गौरव थी ये चिट्ठियाँ!

डाकिया चिट्ठी लाएगा
कोई बांच कर सुनाएगा
देख देख चिट्ठी को
कई कई बार छू कर चिट्टी को
अनपढ़ भी
एहसासों को पढ़ लेते थे!

अब तो स्क्रीन पर अंगूठा दौड़ता है
और अक्सर ही दिल तोड़ता हैं
मोबाइल का स्पेस भर जाए तो
सब कुछ दो मिनिट में डिलीट होता है!

सब कुछ सिमट गया छै इंच में
जैसे मकान सिमट गए फ्लैटों में
जज्बात सिमट गए मैसेजों में
चूल्हे सिमट गए गैसों में,

और इंसान सिमट गए पैसों में . ❤️ 1969

Job                  आवश्यकता.       Jobदांवा डिस्टबुट्र कोOFFICIAL workकी जरूरत हैंयोग्यता -     अनपढ+10वीं+ग्रेजुएशन  ...
31/07/2022

Job आवश्यकता. Job

दांवा डिस्टबुट्र कोOFFICIAL workकी जरूरत हैं
योग्यता - अनपढ+10वीं+ग्रेजुएशन
वर्क - फाईल मेन्टनेश कम्प्यूटर बिल
नोट - रहना+खाना फ्री +सेलरी
(10000+25000)
आवेदन के लिऐ सम्पर्क करे- 9507467982

Address

Prasadi English Arwal
Arwal
804401

Telephone

+957467982

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Krishan ballabh Narayan singh posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Krishan ballabh Narayan singh:

Share