24/11/2025
भारतीय सेना में आज तक अलग से "अहीर रेजिमेंट" का गठन न होना हमारे समाज की वीरता और योगदान के साथ अन्याय है।
इसी कारण, हमारे जवानों की असली बहादुरी और शौर्य को फिल्म के माध्यम से तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया ।
भारत-चीन युद्ध 1962 की रेजांगला की ऐतिहासिक लड़ाई में 13 कुमाऊं रेजिमेंट के 114 अहीर वीरों ने आज़ादी और मातृभूमि की रक्षा के लिए अदम्य साहस दिखाया। उनके बलिदान को हम कभी भूल नहीं सकते। ‘वीर अहीर’ की उपाधि पाने वाले ये योद्धा हमारे समाज की शान हैं।
फिल्म ‘120 बहादुर’ में इन अहीर वीरों की शौर्य गाथा को सही तरीके से नहीं दिखाया गया है, और फिल्म के शीर्षक में से 'अहीर' शब्द को हटाकर हमारे समाज के गौरव को ठेस पहुँचाई गई है। जब कहानी हमारे समाज के शौर्य से जुड़ी है तो नाम **‘120 वीर अहीर’** होना चाहिए था, जिससे पूरे देश को हमारे पूर्वजों की वीरता और बलिदान का सही परिचय मिले।
मेरा आग्रह है कि—
1. फिल्म का नाम ‘120 वीर अहीर’ रखा जाना चाहिए था।
2. फिल्म की आय का हिस्सा शहीद परिवारों के लिए सुरक्षित किया जाए।
3. फिल्म में उन वीर शहीदों को पूर्ण श्रद्धांजलि मिले।
लगभग दो माह पहले ही रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी से अहीर रेजिमेंट के गठन हेतु मिलकर, समाज की आवाज़ को केन्द्र सरकार तक पहुँचाया है। हमें आश्वासन मिला है कि जल्द ही न्याय मिलेगा। लेकिन इसके लिए **अहीर समाज को एकजुट होकर अपने सम्मान व अधिकार के लिए लड़ना होगा।**
हम सब यादव समाज के लोग अपील करते हैं कि अपने सम्मान, संस्कृति और इतिहास की रक्षा के लिए इस फिल्म का बहिष्कार करें और मांगों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाएं।
**अहीर रेजिमेंट के गठन और वीर शहीदों के सम्मान हेतु एकजुट हों!**
"अहीर रेजिमेंट" का गठन हमारा अधिकार है, और हम इसे लेकर रहेंगे! 🇮🇳✊
**जय अहीर वीर! जय हिन्द!**