10/04/2019
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अपाहिज की जिंदगी जी रहे हैं बांकाराम प्रजापत शंकरपुरा सुदाबेरी धोरीमन्ना के निवासी छोटी अवस्था 2 वर्ष की आयु में माँ को खो दी, बकरी व गाय को खिलाने के लिए चारा खेजड़ी पर (लुंख) उतारते समय निचे गिरने से मौत हो गई। तो पिताजी ने घर परिवार चलाने के लिए दूसरी शादी की.. सबकुछ खुशी से ठीक चल रहा था फिर बांकाराम बड़ा होने पर शादी हुई तो एक पुत्री बेटी साथ जी रहे थे। ऊपरवाला रूट गया बाद में बांकाराम अपने घर के आगे पीने का पानी सिंचाई करते समय कुँए में गिर गए तो दोनों पैर व रीड की हड्डी टूट गई इलाज के दौरान दोनों पैर काटने पड़े। ऐसी परिस्थितियां देखकर बांकाराम को पत्नी ने भी साथ छोड़ दिया ओर दूसरी शादी करली। बांकाराम की जिंदगी झोपड़ी में कच्चे मकान टूटी चारपाई तक सीमित है। बेटी 6th में पढ़ रही हैं। घर पर पापा का सहयोग कर रहीं हैं। पिताजी लुम्भाराम खेती बाड़ी का काम करते हैं दूसरी पत्नी लड़के जो पढ़ाई छोड़ कर कारीगरी का काम सीख रहे घर बार चलाने की कोशिश में लगे....
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