28/07/2018
लौटा देना मेरे गज़रे के वो सूखे फूल,
जो जा लिपटे थे वर्दी से तुम्हारे।
देते जाना तुम वो लाल रंग मुझे,
जो नजाने कब तुम्हारे हथेली पर जा लगा था ।
मेरे इंतजार का हिसाब भी करते जाना तुम , जो तुम्हारी याद मे खर्च किये थे मैंने।
हाँ जब तिरंगे से लिपटकर आओगे तुम ,
तो अपनी वर्दी मुझको देते जाना ।
जो तुम आ ना पाओगे कभी , मेरी साँसों को तेरे सीने पे लगा सितारा लौटा जाना ।
~सोनालिका