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*वन्दे मातरम*  *स्वदेशी स्वाभिमान ट्रस्ट कोर कमेटी का निर्माण करने जा रहा है। इस कमेटी में सभी क्षेत्रो(न्याय,राजनीति,स्...
08/11/2020

*वन्दे मातरम*
*स्वदेशी स्वाभिमान ट्रस्ट कोर कमेटी का निर्माण करने जा रहा है। इस कमेटी में सभी क्षेत्रो(न्याय,राजनीति,स्वास्थ्य,आयुर्वेद,सनातन धर्म,शिक्षा,योग,सुरक्षा,सामाजिक,आर्थिक, मिडिया...... ) से जुड़े व्यक्तियों के सहयोग की आवश्यकता है। ऐसे व्यक्ति जो इन क्षेत्रो में निपुण हो व् देश हित में अपनी सेवा देना चाहते है,संस्था आपका हार्दिक अभिनन्दन करती है। सम्पर्क करे।*
*स्वदेशी स्वाभिमान ट्रस्ट*
*सम्पर्क सूत्र-9772821857*

31/10/2020

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भव्य भारत की सुरक्षा व् समृद्धि हेतु देश भर में महाअभियान चलाया जाना है | आप भी इस अभियान में जुड़कर अपना अमूल्य योगदान द...
25/10/2020

भव्य भारत की सुरक्षा व् समृद्धि हेतु देश भर में महाअभियान चलाया जाना है | आप भी इस अभियान में जुड़कर अपना अमूल्य योगदान देश हित में देवे व् अभियान को सफल बनाये |
निवेदक
स्वदेशी स्वाभिमान ट्रस्ट
सिरसा हरियाणा

*वन्दे मातरम्**भारत में आंतकवाद, नक्सलवाद की तरह एक और प्रमुख चुनौती 'संगठित अपराध' भी है | संगठित अपराध से तात्पर्य एक ...
17/10/2020

*वन्दे मातरम्*
*भारत में आंतकवाद, नक्सलवाद की तरह एक और प्रमुख चुनौती 'संगठित अपराध' भी है | संगठित अपराध से तात्पर्य एक ऐसा संगठन जो गैर कानूनी अथवा अवैध व्यापार जैसे कार्यो में लगा हो | मनी लांड्रिंग,हवाला कारोबार,साइबर अपराध,जाली नोटों का वितरण, मानव तस्करी,हथियारों एवं पदार्थों की तस्करी,अवैध व्यापार ये सब संगठित अपराध की श्रेणी में आते है | ये समस्या सम्पूर्ण विश्व की है | भारत जैसे विकासशील देश में ये समस्या अत्यधिक घातक हो जाती है | भारत में विभिन्न वर्गों के बीच मतभेदों की उपस्थिति होना। ये मतभेद आर्थिक, सामाजिक, क्षेत्रीय, नृजातीय, जातिगत, सांप्रदायिक अनेक प्रकार के हैं। अपराधियों द्वारा मतभेदों को भुनाने का प्रयास किया जाता है जो कि आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक है। अनेक क्षेत्रें में नृजातीय संघर्ष एवं अलगाववादी आंदोलन चल रहे हैं और इन आंदोलनों का आपराधिक संगठनों से जुड़ाव भी महत्त्वपूर्ण समस्या है। भारत में शिक्षित बेरोजगारों की बड़ी संख्या में है जिन्हें प्रशिक्षित करके संगठित अपराधों के योग्य बनाया जा सकता है। ये युवा इसके लिए सामाजिक आधार पर कार्य करते हैं। पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों में तनाव अतः विभिन्न पड़ोसियों द्वारा आपराधिक संगठनों को आर्थिक सहायता तथा प्रशिक्षण एवं अस्त्र-शस्त्र की व्यवस्था करना।विकासशील देश होने के कारण भारत के पास आंतरिक सुरक्षा पर खर्च के लिए सीमित आर्थिक संसाधन जबकि आपराधिक संगठनों के पास पर्याप्त वित्त की उपलब्धता की समस्या के कारण संगठित अपराधियों और राजनीतिज्ञों के बीच सहयोग विकसित होने की संभावना बनी रहती है।राजनीतिक-प्रशासनिक जीवन में सबसे भ्रष्टाचार के कारण सीमा पार के आपराधिक संगठनों एवं राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन विकसित होने की संभावना भी बनी रहती है।भारत की ‘गोल्डन ट्रेंगल’ तथा ‘गोल्डन क्रिसेंट’ के बीच अवस्थिति जबकि यह संगठित अपराधों के लिए वित्ततीय स्रोत का कार्य करते हैं। विशेषतौर पर मादक मूल्यों के माफियाओं द्वारा भारत के अलगाववादी गुटों को आर्थिक सहायता दी जाती है तथा ऐसे ग्रुपो के साथ माफियाओं का संबंध भी दिखा है|*
*संगठित अपराध के एक राष्ट्र के अनेक क्षेत्रें तक या अनेक राष्ट्रों तक नेटवर्क हो सकता है। व्यापक नेटवर्क के साथ प्रतिबद्ध व्यक्तियों की एक बड़ी संख्या होती है। संगठित अपराध के नए नए स्वररूप है | हमें इन्हे समझना होगा | और इसे समाप्त करने के लिए बेहतर कानून और बेहतर व्यवस्था की आवश्यकता है | क्युकी भ्रष्ट व्यवस्था पैसो के लिए कभी भी देश को बेच खायगे | आइए,मिलकर प्रयास करे | जनता सब कुछ कर सकती है | बस आवश्यकता है जागरुक होने की | खुद जागररक बने और अन्य लोगो को भी जागरूक करे |*

*निवेदक*
*स्वदेशी स्वाभिमान ट्रस्ट*
*सिरसा हरियाणा*
*https://wa.me/919772821857*

भारत में समस्याओ की बात हर कोई करता है , उसके समाधान की भी बात सभी करते है | लेकिन भारत में समस्याओ का समाधान सरल नहीं ह...
15/10/2020

भारत में समस्याओ की बात हर कोई करता है , उसके समाधान की भी बात सभी करते है | लेकिन भारत में समस्याओ का समाधान सरल नहीं है | इसकी एक ही वजह है सुस्त समाज या सोया समाज | जिस देश का समाज सोया होता है उस देश में संकट कभी भी कम नहीं होते | भारत की जनता १८५७ में भी सो रही थी तब भी जनता अंग्रेजो से आज़ादी के लिए किसी चमत्कार की आश में थे और पूरी तरह राजनीति पर निर्भर | अगर राजा महाराजा करेंगे तो ही देश आज़ाद होगा वरना आम जनता क्या कर सकती है | इसी सोच के कारण १८५७ की क्रांति विफल रही | वही समान हालात अब भी है | १९४७ में लोकतंत्र तो ले लिया | पर समय के साथ सुधार अब तक नहीं किया | जनता वोट डालकर अपना अहसान लोकतंत्र पर करती है | उसके बाद सभी प्रकार के कर्तव्यों से मुक्त | देश व धर्म की रक्षा अब केवल सरकार की जिम्मेदारी है | वजह, हमने वोट दिया है | बाकी सब काम सरकार करे | इसी एक सोच ने देश को अंदर बाहर से खोखला कर रखा है | भारत और विदेशी सरकारों में भेद क्यों है ? क्युकी वहां का समाज जागरूक है , नेता सब एक जैसे होते है | लेकिन वहां का जागरूक समाज नेता को कुछ भी गलत नहीं करने देता | समाज अपनी जिम्मेदारी जानता है और उसी जागरूक समाज के कारण नेता अपना काम पूरा करते है |

देश की राजनीति समाज धर्म हर जगह हस्तक्षेप कर रही है , और हम देख रहे है ? कहाँ की समझदारी है ये ? समाज के द्वारा राजनीति निर्धारित होती है न की राजनीति से समाज | इस बात को जितना जल्द समझ जाए उतना बेहतर है | आज जागरुक समाज भारत की मांग है , और ये काम देश की राजनीति कभी नहीं करेगी | जागरुक बने और देश को मजबूत बनाये | आइए , मिलकर देश व् समाज की रक्षा करे व भारत को समृध्द बनाये |

निवेदक

स्वदेशी स्वाभिमान ट्रस्ट

सिरसा हरियाणा

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