15/04/2024
संत श्री घमंडीराम जी महाराज:
संत श्री घमडीराम जी महाराज का जन्म सम्वतृ 1967, ज्येष्ठ सुदी दूज वार गुरुवार को भोपालगढ़ तहसील के गांव बुद्धा बासनी में हुआ।
उनके पिताजी का नाम शिवराम जी जांगिड़ व माता जी का नाम धनी बाई जी था।
संत श्री घमंडीराम जी महाराज बाल्यावस्था से ही शांत एवं गंभीर प्रवृत्ति के थे।नव वर्ष की छोटी आयु में आप अपने चाचा के साथ संत श्री भोलाराम जी महाराज की जन्म भूमि गुर्जरों की ढाणी आया करते थे। आपके चाचा वहीं पर किसी के यहां लकड़ी का काम करते थे। इसी दौरान आपको संत श्री भोलाराम जी महाराज के दर्शन हुए। उसी समय उनके हृदय में छुपे भक्ति के बीज अंकुरित हो उठे। संत श्री भोलाराम जी महाराज के प्रति इनके हृदय मैं भाव अत्यंत गहरा हो गया तथा बाबजी भोलाराम जी महाराज ने भी अपने हृदय से उनको योग्य समझकर अपनी अपार करुणा भीतर ही भीतर उनके अंदर भर दी।
कुछ दिनों तक वहां रहने के बाद घमंडी राम जी महाराज अपनी जन्मभूमि चाचा के साथ वापस आये । लेकिन उसका मन बाब जी महाराज के चरणों में रम रहा था और शरीर जन्मभूमि में। समय पाकर आप बाबजी भोलाराम जी महाराज के दर्शन हेतु आने जाने लगे । इस प्रकार एक सिलसिला शुरू हुआ जो आज तक जिज्ञासाओं को ऊर्जा दे रहा है। संत घमंडीराम जी महाराज को 15 वर्ष की आयु में नाम दान मिला।
संत श्री घमडी राम जी महराज बाल ब्रह्मचारी थे। आप इतने निर्मल थे कि स्वप्न्न में भी उनमें क्रोध आता किसी ने नहीं देखा। सबके साथ मृदुबानी का व्यवहार कर अपने निर्मल वचनों से दूसरों के हदय को जीत लेते थे। आपका आसन सिद्ध था, सारी रात सत्संग में बैठे रहते थे। 1 मिनट के लिए भी आसन से नहीं डिगते थे। उन्होंने अपने जीवन में अनेक पर्चे दिए, आप वचन सिद्धि थे।
इस प्रकार भजन साधना करते हुए 41 वर्ष की अल्पायु में सम्वतृ 2008 चेत्र सुदी 7 शुक्रवार को देवरी धाम पर देह का परित्याग कर सतलोक सिधारे।
श्री सतगुरु भोलाराम जी महाराज की देवरी- धाम
रतकुड़िया भोपालगढ , जोधपुर (राज.)
सन्त श्री घमण्डी राम जी महाराज की बरसी के पावन अवसर पर कोटि कोटि वंदन (साहेब)
GURJAR (KALSH) BURCHHA m.7023343898