05/08/2025
एक समय की बात है, एक बहुत ही पराक्रमी और बुद्धिमान राजा था। उसका नाम था राजा विक्रम। वह अपने न्याय, दया और वीरता के लिए पूरे राज्य में प्रसिद्ध था। उसके राज्य में सभी लोग सुख-शांति से रहते थे क्योंकि वह अपने प्रजा की भलाई का हमेशा ध्यान रखता था।
एक दिन...
राजा विक्रम को खबर मिली कि राज्य के एक सुदूर गाँव में लोग डर के साये में जी रहे हैं। वहाँ रात को अजीब-अजीब आवाजें आती थीं, और गाँव वाले डर के मारे अपने घरों से बाहर नहीं निकलते थे। राजा ने तुरंत अपने खास सिपाही और मंत्री को बुलाया और कहा:
> "मैं खुद जाकर देखूंगा कि मेरे प्रजा पर क्या विपत्ति आई है।"
सभी लोग हैरान रह गए, लेकिन राजा ने किसी की न सुनी और घोड़े पर सवार होकर अकेले उस गाँव की ओर निकल पड़ा।
गाँव में क्या हुआ?
रात को राजा ने देखा कि गाँव के पास वाले जंगल से तेज रोशनी आ रही है। उन्होंने चुपचाप जाकर देखा कि वहाँ एक पुराना मंदिर है, जहाँ एक तांत्रिक काला जादू कर रहा है। तांत्रिक आत्माओं को बुलाकर गाँव में डर फैलाता था ताकि लोग वहाँ से भाग जाएं और वह जमीन अपने काबू में ले ले।
राजा ने अपनी तलवार निकाली और बहादुरी से तांत्रिक से मुकाबला किया। तांत्रिक ने कई जादू किए, लेकिन राजा की सच्चाई और साहस के आगे वह हार गया। राजा ने मंदिर को शुद्ध करवाया और तांत्रिक को कारागार में डलवा दिया।
अंत में...
गाँव वाले बहुत खुश हुए और राजा को धन्यवाद देने लगे। उन्होंने कहा:
> "राजा विक्रम केवल हमारा शासक नहीं, बल्कि हमारे रक्षक भी हैं।"
राजा ने मुस्कुरा कर कहा:
> "राजा वही जो अपनी प्रजा के दुख को अपना दुख समझे।"
सीख:
राजा वही सच्चा होता है जो अपने लोगों की रक्षा करे, चाहे उसे खुद खतरे में क्यों न डालना पड़े।