PREHIM-Preetam Negi

PREHIM-Preetam Negi This page is created by me to explore the natural beauty of himalayan region of north INDIA. Lets explore the beauty of nature with me.

PREHIM also shows its own meaning PRE stands for Preetam and HIM stands for Himalaya.

"देवदार और चीड़ के ऊंचे पेड़ों की ओट से झांकता एक ऐसा शहर, जहाँ की हर सुबह हिमालय की बर्फीली चोटियों को चूमकर शुरू होती ...
31/05/2026

"देवदार और चीड़ के ऊंचे पेड़ों की ओट से झांकता एक ऐसा शहर, जहाँ की हर सुबह हिमालय की बर्फीली चोटियों को चूमकर शुरू होती है। यहाँ की घुमावदार संकरी सड़कें सिर्फ रास्तों को नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति के गहरे अहसासों को आपस में जोड़ती हैं।
​लकड़ी की नक्काशी से सजे पुराने पारंपरिक घर और पहाड़ियों पर बिखरी रोशनी की कतारें ऐसी लगती हैं, मानो किसी कलाकार ने कैनवास पर कोई जादू बिखेर दिया हो। यह सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि सुकून का वो कोना है जहाँ आकर वक्त भी कुछ पल के लिए ठहर जाता है। प्रकृति का एक ऐसा नायाब अक्स, जिसे शब्दों में नहीं, सिर्फ महसूस किया जा सकता है।"
। यह जन्नत जैसी जगह आखिर है कहाँ! बताओ तो जरा?

"इस दृश्य के लिए कुछ खास है जो दिल को छू जाता है। क्या किसी को पता है कि यह कौन सी पर्वतमाला है?         मुझे यह जानकर ख...
28/05/2026

"इस दृश्य के लिए कुछ खास है जो दिल को छू जाता है। क्या किसी को पता है कि यह कौन सी पर्वतमाला है?
मुझे यह जानकर खुशी होगी! "
देखते हैं कौन कौन पहचानता है इसे....

(Red-rumped Swallow)        एक छोटा और आकर्षक प्रवासी पक्षी है, जो अपने विशिष्ट रंगों के लिए पहचाना जाता है। इसके ऊपरी ह...
05/05/2026

(Red-rumped Swallow)

एक छोटा और आकर्षक प्रवासी पक्षी है, जो अपने विशिष्ट रंगों के लिए पहचाना जाता है। इसके ऊपरी हिस्से नीले-काले होते हैं, जबकि इसकी पीठ का निचला हिस्सा (rump) हल्का नारंगी या लाल होता है, जो इसे अन्य स्वेलो पक्षियों से अलग बनाता है।
​यह पक्षी मुख्य रूप से खुले पहाड़ी क्षेत्रों, खेती की जमीन और गांवों के पास पाया जाता है। इसकी पूंछ गहरी दो-शाखाओं वाली (forked) होती है, जो उड़ते समय बहुत सुंदर लगती है। ये मिट्टी से प्याले के आकार का घोंसला बनाते हैं, जिसमें अक्सर एक लंबी सुरंग जैसा प्रवेश द्वार होता है। मुख्य रूप से हवा में उड़ने वाले कीड़ों को खाकर ये पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं।

Nikon ZF
NIKKOR Z 70-200 F2.8 VR S
F / 3.2
S S 1/1000
ISO 100

Star Walk
25/04/2026

Star Walk

घुमक्कड़:धूमकेतु C/2025 R3 का दुर्लभ चित्र    आज सुबह जब अधिकांश लोग नींद की आगोश में थे प्रातः के 3:00 बजे के अलार्म के...
23/04/2026

घुमक्कड़:धूमकेतु C/2025 R3 का दुर्लभ चित्र

आज सुबह जब अधिकांश लोग नींद की आगोश में थे प्रातः के 3:00 बजे के अलार्म के साथ मैं अपना कैमरा और स्टैंड लेकर चल पड़ा अंधेरे में बांज बुरांश के घने जंगलों बीच सूनी सड़क पर,तब पूर्व दिशा में एक अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक खगोलीय घटना घटित होने जा रही थी। सौर मंडल के सुदूर कोनों से आया एक अनजान यात्री, धूमकेतु C/2025 R3 (PANSTARRS), हमारे आकाश से गुजरने जा रहा था।
खगोलीय विज्ञान की दृष्टि से C/2025 R3 (PANSTARRS)कोई साधारण धूमकेतु नहीं है। यह धूमकेतु हमारे सौर मंडल के सबसे बाहरी घेरे, जिसे 'ऊर्ट क्लाउड' (Oort Cloud) कहा जाता है, से आया है। यह क्षेत्र सूर्य से इतना दूर है कि वहाँ सूर्य की रोशनी नहीं पहुंच पाती हैं, पानी और गैसें पत्थर की तरह सख्त बर्फ में जमी रहती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये धूमकेतु हमारे सौर मंडल के निर्माण के समय के 'अवशेष' हैं, जो अपने भीतर अरबों साल पुराने रहस्य छुपाए हुए हैं।
जब यह धूमकेतु सूर्य के करीब आता है, तो सूर्य की गर्मी इसकी जमी हुई बर्फ को गैस में बदल देती है। इस प्रक्रिया को 'सब्लीमेशन' कहते हैं। इसी के कारण इसके केंद्र के चारों ओर गैस और धूल का एक चमकदार घेरा बन जाता है, साथ ही सूर्य के विपरीत दिशा में यह गैस की पूंछ दिखाई देती है। खिरसु /फैड़खाल/उल्लीधार से ली गई तस्वीर में R3 ☄️ comet अपनी पूरी भव्यता के साथ दिखाई दे रहा है।
एस्ट्रो-फोटोग्राफी, विशेषकर एक बेहद कम रोशनी वाले गतिमान धूमकेतु को कैद करना, किसी चुनौती से कम नहीं है। सुबह के पौ फटने से ठीक पहले का समय सबसे कठिन होता है क्योंकि प्रकाश की मात्रा बहुत कम होती है और वातावरण में हल्की धुंध होती है। मैंने Nikon Z f 'फुल-फ्रेम सेंसर' का उपयोग किया, जो अंधेरे में भी बारीक विवरणों को पकड़ने में सक्षम है। 70-200mm f/2.8 लेंस के बड़े अपर्चर ने धूमकेतु की मंद रोशनी को सोखने में मेरी मदद की, जिससे इसकी 'पूँछ' के शुरुआती संकेत भी तस्वीर में उभर आए। हालांकि धूमकेतु की बेहद कम चमक के कारण 200mm की फोकल लेंथ पर तारों को स्थिर रखना और धूमकेतु की स्थिति को फ्रेम के बीच में लाना भी एक थका देने वाला काम है। वह भी रात के अंधेरे में, जंगल के बीच, बाघ की डर अलग!!!
सच कहूं तो खिरसु, पौड़ी गढ़वाल का क्षेत्र अपने साफ वातावरण और न्यूनतम प्रकाश प्रदूषण का है। जो कि एस्ट्रो फोटोग्राफी के लिए उपयुक्त है।

21/04/2026

छत से अनंत की यात्रा: जब डर और सौंदर्य का मिलन हुआ-
​फोटोग्राफी अक्सर हमें दूर-दराज के इलाकों में ले जाती है, लेकिन कभी-कभी सबसे जादुई दृश्य आपके ठीक ऊपर, आपकी अपनी छत पर इंतजार कर रहे होते हैं। कल रात करीब 3 बजे, खिरसू की पहाड़ियों पर स्थित अपने घर की छत से मैंने एक बार फिर 'मिल्की वे' (आकाशगंगा) के उस भव्य स्वरूप को कैमरे में कैद किया।
​खिरसू का सौभाग्य है कि यहाँ का आसमान 'बोर्टल स्केल 2' की शुद्धता समेटे हुए है। लेकिन इस बार का अनुभव थोड़ा अलग था। जब मैं अंधेरे में अपने Nikon Zf को ट्राइपॉड पर सेट कर रहा था, तो पास के घने जंगलों से आती सरसराहट और जंगली जानवरों की मौजूदगी का अहसास रोंगटे खड़े कर देने वाला था। एक तरफ मन में सुरक्षा को लेकर एक अनजाना सा डर था, और दूसरी तरफ आँखों के सामने फैला वह दिव्य प्रकाश पुंज, जो मुझे हिलने तक नहीं दे रहा था। वह डर और आश्चर्य (Awe) का एक ऐसा संगम था, जिसे केवल एक प्रकृति प्रेमी ही महसूस कर सकता है।
​मैंने f/2.8 और 20 सेकंड क�

खिरसू के आसमान में सितारों की इबारत-       ​रात के सन्नाटे में, जब पूरी दुनिया सो रही थी, मैं खिरसू की पहाड़ियों पर ब्रह...
18/04/2026

खिरसू के आसमान में सितारों की इबारत-

​रात के सन्नाटे में, जब पूरी दुनिया सो रही थी, मैं खिरसू की पहाड़ियों पर ब्रह्मांड के इस जादुई दृश्य को कैद कर रहा था। इस शॉट के लिए मैंने अपने Nikon Z f के साथ Nikkor Z 14-24mm f/2.8 S लेंस का चुनाव किया।
​आकाशगंगा (Milky Way) की भव्यता को पूरी स्पष्टता के साथ उभारने के लिए मैंने 14mm की फोकल लेंथ, f/2.8 अपर्चर और 15 सेकंड का शटर स्पीड रखा। ISO 2500 पर इस कैमरे के सेंसर ने रात के अंधेरे में भी सितारों की उस महीन चमक को बखूबी समेटा है। खिरसू का प्रदूषण मुक्त आकाश और सही तकनीकी तालमेल ने मिलकर इस अविस्मरणीय पल को जन्म दिया। आशा है कि ब्रह्मांड की यह विशालता आपको भी उतनी ही मंत्रमुग्ध करेगी।

कौसानी: हिमालय का भव्य दर्पण।​उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित कौसानी को इसके अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य के कारण 'भारत...
30/03/2026

कौसानी: हिमालय का भव्य दर्पण।
​उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित कौसानी को इसके अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य के कारण 'भारत का स्विट्जरलैंड' भी कहा जाता है। यहाँ से हिमालय का जो मनोरम दृश्य दिखाई देता है, वह शब्दों से परे है।
इस खूबसूरत हिल स्टेशन से नंदा देवी, त्रिशूल और पंचचूली जैसी गगनचुंबी चोटियों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय जब सूरज की किरणें इन बर्फीली चोटियों पर पड़ती हैं, तो वे सोने की तरह चमकने लगती हैं। कौसानी से चीड़ और देवदार के घने जंगलों के बीच से हिमालय को निहारना एक आध्यात्मिक और शांतिपूर्ण अनुभव प्रदान करता है।

27/03/2026

बसन्त ऋतु की ठंडी, शांत रात, रात के लगभग 3 बजे। घने अंधेरे में मेरा कैमरा और मैं अकेले। ऊपर आसमान में जगमगाती आकाशगंगा मुझे अपनी ओर खींच रही थी। चारों ओर सन्नाटा था,आजकल बाघ के आतंक कारण हर आहट पर मन घबरा रहा था। एक छोटी टॉर्च और हाथ में कैमरा Nikon Zf , डर और उत्सुकता का मिला-जुला अहसास। फिर, मेरे कैमरे ने अपनी आकाशगंगा के उस अद्भुत नज़ारे को पकड़ ही लिया, और हमेशा की तरह मेरा वो पल यादगार बन गया।
Nikon Zf
Nikkor 14-24 f2.8
F2.8
Exp. 15Sec.
ISO 1600

Address

Khirsu, Pauri Garhwal Uttarakhand , 246147
Lucknow
226001

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+918958846144

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