27/06/2026
2026 का मानसून इस बार सच में उल्टा-पुल्टा चल रहा है — कभी अचानक तेज़ बारिश, तो कभी हफ़्तों तक सूखा। इसके पीछे 3 बड़ी वजहें हैं जो IMD और सैटेलाइट डेटा से सामने आ रही हैं:
1. एल नीनो ने खेल बिगाड़ दिया
जून के बाद से एल नीनो एक्टिव हो गया है। एल नीनो प्रशांत महासागर का गर्म होना है जो सीधे भारत की मानसूनी हवाओं को कमजोर कर देता है। इसी वजह से IMD का अनुमान है कि इस साल बारिश LPA का सिर्फ 92% ही होगी — यानी नॉर्मल से कम। 4-15 जून के बीच तो सिर्फ 19.2mm बारिश हुई, जबकि नॉर्मल 53.7mm होता है — 64% कमी।
2. बारिश का बंटवारा गड़बड़ है
सब जगह एक जैसा नहीं हो रहा। उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत — राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, MP में बारिश बहुत कम रहेगी। वहीं पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में नॉर्मल से ज्यादा बारिश हो सकती है। मतलब कहीं बाढ़, कहीं सूखा।
3. मानसून की चाल ही बदल गई
मानसून 9 दिन लेट आया और कई जगह रुक-रुक कर चल रहा है। सैटेलाइट इमेज में दिख रहा है कि जून के बीच में ही मानसूनी बादल गायब हो गए।
इसका असर क्या है?
भारत की 60% खेती सिर्फ मानसून पर टिकी है। धान, दाल, कपास, सोयाबीन की बुआई लेट हो रही है। सूखी मिट्टी में बोने से पूरी फसल खराब हो सकती है। साथ ही गर्मी बढ़ने से कीड़े-मकोड़े भी फसलों पर अटैक कर रहे हैं।
अच्छी बात ये है कि पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल जुलाई के आसपास बन सकता है, जो अगस्त-सितंबर में बारिश बढ़ा सकता है। पर तब तक पानी बचाना और मौसम के हिसाब से प्लान करना ही समझदारी है।
आप महाराष्ट्र/नासिक में हो, तो वहां भी असर दिखेगा — महाराष्ट्र के 181 ब्लॉक एल नीनो से 'हाई रिस्क' में हैं।