08/10/2024
आओ कुछ बात कड़वी कर लेते है कांग्रेस के गठबंधन की।
बात राजस्थान की करते हैं जहां चुनावों से पहले तक भाजपा की कोई बड़ी जीत नजर नहीं आ रही थी,तो लाजमी था कांग्रेस को गुरूर करना।लेकिन कुछ मुद्दे ऐसे थे कि जनता चाहती थी भाजपा की लगातार जीत का पहिया थोड़ा रोका जाए, इन्हीं मुद्दों की वजह से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी अपने हाथ कांग्रेस की तरफ बढ़ाती है,जो विश्लेषक बकते है कि हनुमान से कौन गठबंधन चाहता था,उसी समय भाजपा चाहती थी कि पुनः वो गठबंधन हो लेकिन हनुमान नहीं गए क्योंकि वो उस गठबंधन कुछ मुद्दों पर छोड़कर आए थे जिसके लिए उन्होंने कांग्रेस के साथ जाना उचित समझा।
अब देखे कांग्रेस का गठबंधन धर्म-
सबसे पहले जिसके साथ बैठे उसको तोड़ दो।
2 सीट चाहती थी,क्योंकि निश्चित ही वो दोनों जगह मजबूत थी एक नागौर एक बाड़मेर।
बाते लम्बी खींची गई ताकि सामने वाले को कमजोर किया जाए,चुनाव नजदीक आ रहे थे लेकिन कांग्रेस गंठबंधन में लगातार गांठ लगाती जा रही थी,उसका मकसद ये था कैसे भी करके हनुमान को रोके रखो,अंत समय पर अकेले छोड़ देंगे, ऐसा ही किया।उन्होंने एक मजबूत सिपाही को #धोखे से तोड़ लिया।बात यही खत्म नहीं हुई,कुछ प्रयास नागौर में किए गए।गठबंधन में थे बावजूद हनुमान को ही हराना चाहते थे।बाड़मेर सीट की टीस हनुमान के लिए बहुत गहरी है, राजनीति एक अलग विषय है और सामाजिकता एक अलग।जो व्यक्ति बहुत गर्व से आगे बढ़ रहा था उसको इन्होंने तोड़ दिया।प्रचार के समय भी यही इल्ली बिल्ली गवती रही।हनुमान का उपयोग चाहते तो ये कुछ क्षेत्रों में और अच्छे से कर सकते थे,पर चिंता थी #मजबूत कांग्रेस के कुछेक नेताओं को।कही उनकी शाख न गिर जाए।बाड़मेर की राजनीति में भले ही ये दावा करते हो कि हम अपने दम पर जीते लेकिन rlp के कार्यकर्ता दिल से जुड़े व्यक्ति का साथ दे गए और वो जीत भी गया।एक सीट जयपुर ग्रामीण की आराम से निकाल सकते थे हनुमान का उपयोग करके पर नहीं जी मजबूत है हम तो।कहानी अब आती है हरियाणा चुनाव की, पता नहीं कौनसी इनकी सर्वे एजेंसी है जो इनको बहकाकर रखती है, अजी तुम ही जीतोगे। अंत में आले ये क्या हो गया? कांग्रेस वर्तमान में बैसाखियों पर चल रही है,और इसने अपनी बैसाखी(सहयोगी क्षेत्रीय दल) ही तोड़ डाले,तो गिरोगे तो आप भी।यहीं हुआ हरियाणा में,एकदम से घमंड की धारा बहने लगी।चाहते तो गठबंधन का उपयोग करके और मजबूती से आगे बढ़ सकते थे,वहां भी अपने इगो में छोटी पार्टियों को दरकिनार कर दिया,परिणाम आपके सामने है।ये बोलते है भाजपा में परिवारवाद है अरे महाराज उनका संगठन बहुत मजबूत है,धरातल पर मेहनत करते हैं,आपकी तरह विदेशों में नहीं घूमते।हाल फिलहाल के चार राज्य कांग्रेस ने परिवारवाद की वजह से गंवा दिए।अगर यही स्थिति रही तो बैसाखियां भी साथ छोड़ जाएंगी और आप हाथ मलते रह जाना।लिखने को कितना भी लिख लो,क्या ही फर्क पड़ता है। राष्ट्रीय गठबंधन की तो आप सभी को पता ही है क्या हाल है इनके।🙏