Avika Events Planner

Avika Events Planner venues ,photo graphers ,makeup ,groom wear ,mehndi ,food ,invites & gifts ,music & dance ,pandits.

21/07/2025

Facebook पर मुझे 3 साल पूरे होने का जश्न मनाया जा रहा है. सपोर्ट करने के लिए आपका धन्यवाद. आपके सपोर्ट के बिना मेरे लिए यह कर पाना संभव नहीं था. 🙏🤗🎉

02/07/2025

“अठारह पापों की दुकान”

शहर के बीचोंबीच एक छोटी सी दुकान थी – “मन की दुकान”। यहाँ हर दिन तरह-तरह के लोग आते-जाते रहते थे। इस दुकान का मालिक था – अर्जुन। अर्जुन ने एक बोर्ड लगाया था – “यहाँ आत्मा को हल्का करने का सामान मिलता है।”

एक दिन, अर्जुन की दुकान में एक युवक आया – नाम था विवेक। वह परेशान था, बोला, “मेरे जीवन में बहुत दुख है, मन भारी रहता है। कुछ हल्का होने का उपाय बताइए।”

अर्जुन मुस्कराया और बोला, “तुम्हारे मन में अठारह बोझ हैं, इन्हें उतार दो, जीवन हल्का हो जाएगा।”

विवेक चौंका – “कैसे बोझ?”

अर्जुन ने समझाया:

“क्या तुम कभी किसी को चोट पहुँचाते हो?”

“कभी-कभी गुस्से में...”

“यह प्राणातिपात है।”

“कभी झूठ बोलते हो?”

“हाँ, काम निकालने के लिए।”

“यह मृषावाद है।”

“कभी बिना पूछे किसी की चीज़ ली?”

“बचपन में...”

“यह अदत्तादान है।”

“कभी बुरी आदतों में फँसे?”

“कभी-कभी।”

“यह मैथुन है।”

“कभी चीज़ों का लालच किया?”

“बहुत बार।”

“यह परिग्रह है।”

अर्जुन ने इसी तरह सभी 18 पापों के बारे में बताया – क्रोध, घमंड, कपट, लोभ, मोह, द्वेष, झगड़ा, झूठा आरोप, चुगली, निंदा, विषयों में आसक्ति, कपट सहित झूठ, और गलत विश्वास।

विवेक ने महसूस किया कि ये सभी बोझ उसके जीवन में हैं। अर्जुन बोला, “हर दिन इन बोझों में से एक को पहचानो और छोड़ने की कोशिश करो। देखना, तुम्हारा मन हल्का होता जाएगा।”

विवेक ने अर्जुन की बात मानी। उसने हर दिन एक-एक पाप छोड़ना शुरू किया। कुछ हफ्तों बाद वह फिर दुकान पर आया – चेहरे पर शांति थी।

अर्जुन मुस्कराया, “अब तुम्हारी आत्मा हल्की है। यही जैन धर्म का संदेश है – अठारह पापों को छोड़ो, जीवन को शुद्ध बनाओ।”

इस तरह अर्जुन की “मन की दुकान” हर किसी को सिखाती रही – पापों का त्याग ही असली हल्कापन है।

02/07/2025

🛕 जगन्नाथ मंदिर, पुरी: ऐसे रहस्य जिन्हें विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया! 🌪️✨

"यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि रहस्य, श्रद्धा और शक्ति का अद्भुत संगम है।"

पुरी का जगन्नाथ मंदिर न सिर्फ हिन्दू आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि ऐसा स्थान भी है, जहां वैज्ञानिक नियम भी विफल हो जाते हैं। आइए जानें इसके कुछ ऐसे अनजाने और चौंकाने वाले तथ्य, जिन पर विश्वास करना मुश्किल है!

🔍 1. मंदिर की छाया क्यों नहीं दिखती?

सदियों से यह बात आश्चर्य का विषय है कि इस विशाल मंदिर की छाया दिन के किसी भी समय ज़मीन पर नहीं पड़ती।
👉 क्या यह वास्तुकला का चमत्कार है या कोई दिव्य रहस्य?

🌀 2. हवा की उल्टी दिशा में लहराता ध्वज (Flag)

मंदिर के ऊपर लगा ध्वज सदैव हवा की दिशा के विपरीत लहराता है।
यह बात विज्ञान के नियमों के खिलाफ है, लेकिन हर दिन ऐसा ही होता है।

🐦 3. कोई पक्षी या विमान मंदिर के ऊपर से नहीं उड़ता

पुरी के ऊपर के आकाश में कोई पक्षी उड़ता नहीं दिखाई देता, और आज तक किसी भी विमान को मंदिर के ऊपर से उड़ान की अनुमति नहीं दी गई है।
👉 मान्यता है कि यह स्थान शुद्ध आध्यात्मिक ऊर्जा से आवृत है।

🌊 4. समुद्र की आवाज़ मंदिर के अंदर नहीं आती!

पुरी समुद्र के किनारे है, लेकिन जब आप मंदिर के सिंह द्वार से अंदर जाते हैं तो समुद्र की आवाज़ पूरी तरह गायब हो जाती है।
जैसे ही आप बाहर आते हैं, वह गड़गड़ाहट फिर सुनाई देने लगती है।

🛶 5. 'प्रसाद' कभी कम नहीं पड़ता – न ज़्यादा बचता है

मंदिर में रोज़ हजारों भक्तों को महाप्रसाद मिलता है, लेकिन न कभी कम पड़ता है और न ही अधिक बचता है।
👉 कोई कंप्यूटर नहीं, कोई गणना नहीं – फिर भी हर दिन चमत्कार!

🧱 6. 12वीं शताब्दी में बना, लेकिन आज भी टिका है बिना तकनीक के

इस मंदिर को 12वीं सदी में गजपति राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव ने बनवाया, लेकिन इसकी संरचना आज भी भूकंप और तूफानों में अडिग रहती है।

🧙‍♂️ 7. रथ यात्रा में रथ का रुक जाना और चलना — रहस्य या संकेत?

जगन्नाथ जी की रथ यात्रा के दौरान कई बार ऐसा हुआ है कि रथ बिना कारण रुक जाता है, और फिर विशेष समय पर ही आगे बढ़ता है।
👉 मान्यता है कि भगवान स्वयं अपने रथ का नियंत्रण करते हैं।

🔔 क्या यह सिर्फ आस्था है या विज्ञान से परे कोई दिव्यता?

जगन्नाथ मंदिर हमें यह सिखाता है कि विश्वास और विज्ञान दोनों की सीमाएं हैं — पर आस्था की नहीं।

💬 आपका क्या मानना है? क्या आपने इन रहस्यों को स्वयं अनुभव किया है?

👇 कमेंट करके जरूर बताएं, और इस रहस्यमय चमत्कार को सबके साथ साझा करें!

📢 #पुरी_का_रहस्य

02/07/2025

जी हाँ, प्रेम आत्मा का भोजन है । प्रेम से आत्मा अपने आपको सम्पूर्ण, जीवंत और जुड़ा हुआ महसूस करती है।

यदि हम आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखे तो प्रेम ईश्वर का स्वरूप है और मीरा, राधा इनकी आत्मा का भी पोषण सिर्फ प्रेम से हुआ । वो भी अलौकिक प्रेम से ❤️❤️

इसी प्रकार से मानव दृष्टि से देखने पर जब किसी को सच्चा प्रेम होता है चाहे प्रकृति से, चाहे व्यक्ति से या ईश्वर से किसी से भी तो वो आन्तरिक रूप से आनन्दित रहता है । यहीं वो स्थिति है जब आत्मा प्रेम द्वारा संतुष्ट और तृप्त होकर अलग ही अनुभव महसूस करती है ।

इसी भाव को सवांद रूप में -

रूह ने प्रेम से कहा -

तुम बिन मै बस साँसो का सिलसिला हूँ

ना सुर है, ना तरंग है

ना गीत है, ना साज है

ना खुशबू है, ना हवा है

तब प्रेम ने हल्की सी मुस्कान दी और कहा -

" अरी पगली, मै तुझमे ही तो समाहित हूँ

हर धड़कन में, हर स्पर्श में,

मै तेरा ही तो हिस्सा हूँ ।

तब रूह चुप हो गई और नम आँखो से कहा -

अब समझी हूँ मै

मेरा जीवन है तू

मेरा भोजन है तू ।

मेरा कण -कण है तू

मै इतना ही कहूंगी कि ..

मै तुझसे ही हूँ और

तुझमें ही पूर्णतः समाहित हूँ ।

तभी प्रेम ने आत्मा को थाम लिया और कहा -

- अब हमारे बीच कोई दूरी नही

तू मैं हूँ, मैं तू है,

अब कोई अधूरी बात नही,

तब रूह मुस्कुराई और बोली कि

" तेरे स्पर्श से ही मैंने खुद को जाना है .

"अहा ! कितना सरल है तेरा मेरा मिलना,"❤️❤️

अब न तो शब्द थे, ना ही मौन की उपस्थिति सिर्फ एक अनुभूति का प्रकाशपुंज था ।

यह वो मिलन था , जहां आत्मा और प्रेम एक दूसरे में समाहित थे , और ईश्वर उनका साक्षी ।

©✍️ राधे राधे🙏🙏

WE CREAT YOU CELEBRATE
04/12/2022

WE CREAT YOU CELEBRATE

WE CREATE YOU CELEBRATE
03/12/2022

WE CREATE YOU CELEBRATE

26/11/2022

Address

Patilar

Telephone

+917759025686

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Avika Events Planner posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category