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Hidden Bihar की खूबसूरती, झरनों से लेकर किलों तक — सब कुछ हमारी नजर से।
🎥 Drone shots | 📍Rohtas-Kaimur

YouTube | Instagram | Facebook पर जुड़ें In Bihar many districts sitting in the lap of nature,Rohtas Kaimur is one of those districts.But due to lack of proper travel arrangements, the tourist places here have not developed much. There are many tourist places in Biha

r, some are developed and some are not.Due to the dual attitude of the government, some districts do not develop much.There are many such video creators like Green Life Bihar page who make videos on all these things and show them to the people, The purpose of all of us is to know our state too, get acquainted with the beautiful place of our district.

🔄 मांझर कुंड को 360° में एक बार ज़रूर घुमाकर देखिए...हो सकता है कुछ पलों के लिए आपको ऐसा महसूस हो, जैसे आप खुद रोहतास की...
10/07/2026

🔄 मांझर कुंड को 360° में एक बार ज़रूर घुमाकर देखिए...

हो सकता है कुछ पलों के लिए आपको ऐसा महसूस हो, जैसे आप खुद रोहतास की इन खूबसूरत पहाड़ियों के बीच खड़े हों।

क्या आपने कभी सोचा है कि मांझर कुंड आखिर बना कैसे...?

आज जिस मांझर कुंड, सासाराम (रोहतास, बिहार) की खूबसूरती देखने हजारों लोग आते हैं, वह किसी राजा ने नहीं बनवाया... न ही इसे किसी इंसान ने तराशा।

इसे बनाया है प्रकृति ने।

कैमूर की प्राचीन चट्टानों पर लाखों वर्षों तक बहते पानी ने धीरे-धीरे अपनी राह बनाई। समय के साथ इन्हीं चट्टानों का कटाव हुआ, गहरी घाटियाँ बनीं और फिर जन्म हुआ मंझारकुंड जैसे प्राकृतिक जलप्रपात का।

यही कारण है कि बरसात आते ही यह पूरा इलाका जीवंत हो उठता है। पहाड़ों से उतरता पानी, चारों ओर फैली हरियाली और गूंजती जलधारा ऐसा दृश्य बनाती है, जिसे शब्दों में नहीं, सिर्फ़ महसूस किया जा सकता है।

एक और रोचक बात...

रक्षाबंधन के बाद यहाँ वर्षों से मेला लगता है और दूर-दूर से लोग इस प्राकृतिक धरोहर को देखने आते हैं। यह जगह सिर्फ़ पिकनिक स्पॉट नहीं, बल्कि रोहतास की प्राकृतिक पहचान है।

हम अक्सर विदेशों की घाटियों और झरनों की बातें करते हैं...

लेकिन बिहार के रोहतास में प्रकृति ने जो विरासत बनाई है, वह किसी अजूबे से कम नहीं।

📍 मांझर कुंड, सासाराम, रोहतास, बिहार

360° में इस तस्वीर को एक बार ज़रूर घुमाइए...हो सकता है पहली नज़र में आपको यकीन ही न हो कि यह नज़ारा बिहार का है।यह है जे...
09/07/2026

360° में इस तस्वीर को एक बार ज़रूर घुमाइए...

हो सकता है पहली नज़र में आपको यकीन ही न हो कि यह नज़ारा बिहार का है।

यह है जेठियन वैली, गया (बिहार) — एक ऐसी जगह, जिसे आज लोग प्यार से "Mini Ladakh of Bihar" भी कहने लगे हैं। लेकिन इसकी खूबसूरती किसी नाम की मोहताज नहीं।

घुमावदार सड़कें...
पहाड़ों के बीच से गुजरती रेलवे लाइन...
बदलते मौसम के साथ रंग बदलती घाटियाँ...
और चारों ओर फैली ऐसी शांति, जिसे कैमरा पूरी तरह कैद ही नहीं कर सकता।

कहा जाता है कि यह इलाका भगवान बुद्ध के राजगीर की ओर जाने वाले प्राचीन मार्ग से भी जुड़ा रहा है। आज भी यहाँ की वादियाँ इतिहास और प्रकृति को एक साथ महसूस कराती हैं।

📱 अब जल्दी मत कीजिए...

इस 360° फोटो को चारों ओर घुमाइए।

एक दिशा में दौड़ती रेलवे लाइन दिखाई देगी...
दूसरी तरफ़ पहाड़ों को चीरती सड़क...
और हर ओर ऐसा दृश्य, जो बार-बार कहेगा—

"यकीन नहीं होता कि यह बिहार है!"

अगर आपने अभी तक जेठियन वैली नहीं देखी, तो अपनी ट्रैवल लिस्ट में इसे ज़रूर जोड़िए।

💬 बताइए... अगर आपको यहाँ आने का मौका मिले, तो आप ट्रेन से सफर करना पसंद करेंगे या बाइक से इस घाटी का रोमांच लेना चाहेंगे?

📍 जेठियन वैली, गया, बिहार

🔄 360° में इस तस्वीर को एक बार ज़रूर घुमाइए...हो सकता है कुछ पलों के लिए आपको ऐसा महसूस हो, जैसे आप खुद रोहतासगढ़ किले क...
07/07/2026

🔄 360° में इस तस्वीर को एक बार ज़रूर घुमाइए...

हो सकता है कुछ पलों के लिए आपको ऐसा महसूस हो, जैसे आप खुद रोहतासगढ़ किले की पहाड़ियों के बीच खड़े हों।

यह वही स्थान है, जहाँ रेहल गाँव पार करने के बाद रोहतासगढ़ किले का पहला प्रवेश द्वार आता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह सिर्फ़ एक रास्ता नहीं, बल्कि प्रकृति का एक अद्भुत व्यू पॉइंट भी है।

बरसात के मौसम में दूर-दूर तक फैली हरी-भरी घाटियाँ, पहाड़ों से उतरते छोटे-बड़े झरने, बादलों की आवाजाही और शाम के समय दिखाई देने वाला खूबसूरत Sunset View... इस जगह को रोहतास की सबसे यादगार लोकेशनों में से एक बना देते हैं।

जो लोग सीधे किले की ओर निकल जाते हैं, वे अक्सर इस दृश्य को महसूस किए बिना आगे बढ़ जाते हैं।

इसलिए इस बार जल्दी मत कीजिए...

📱 360° में पूरी तस्वीर घुमाइए।
हर दिशा में एक नया नज़ारा आपका इंतज़ार कर रहा है। शायद किसी तरफ़ आपको झरना दिखाई दे, किसी तरफ़ अनंत घाटियाँ और किसी तरफ़ ऐसा दृश्य, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

रोहतासगढ़ सिर्फ़ एक किला नहीं है...
यह इतिहास, प्रकृति और रोमांच का ऐसा संगम है, जिसे हर बिहारी को कम-से-कम एक बार अपनी आँखों से ज़रूर देखना चाहिए।

💬 अगर आपको यहाँ आने का मौका मिले, तो सबसे पहले आप सूर्योदय देखना चाहेंगे या सूर्यास्त?

📍 पहला प्रवेश द्वार व्यू पॉइंट, रोहतासगढ़ किला, रेहल गाँव के आगे, रोहतास (बिहार)

🚨 क्या बिहार की सबसे अनमोल धरोहरों में से एक, हमारी आँखों के सामने धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है...?यह तस्वीरें रोहतासगढ...
04/07/2026

🚨 क्या बिहार की सबसे अनमोल धरोहरों में से एक, हमारी आँखों के सामने धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है...?

यह तस्वीरें रोहतासगढ़ किला परिसर की हैं...

📍 चौरासन मंदिर
📍 माँ पार्वती मंदिर
📍 और सदियों से इतिहास को अपने भीतर समेटे हुए ये प्राचीन अवशेष।

एक समय था जब इन मंदिरों की भव्यता दूर-दूर से आने वाले यात्रियों को आकर्षित करती थी। आज भी जो एक बार यहाँ पहुँचता है, वह इस जगह को कभी भूल नहीं पाता। लेकिन एक सवाल हर बार मन में उठता है...

क्या इन धरोहरों को सिर्फ समय के भरोसे छोड़ दिया गया है?

माँ पार्वती मंदिर की छत जगह-जगह से क्षतिग्रस्त दिखाई देती है। कई प्राचीन संरचनाओं पर मौसम और समय की मार साफ़ नज़र आती है। अगर नियमित वैज्ञानिक संरक्षण, मरम्मत और देखरेख नहीं हुई, तो नुकसान हर साल बढ़ता जाएगा।

सबसे दुख की बात यह है कि...

जिस रोहतासगढ़ किले को भारत के सबसे विशाल और ऐतिहासिक पहाड़ी किलों में गिना जाता है, वह आज भी अपनी वास्तविक पहचान और संरक्षण का इंतज़ार कर रहा है।

पर्यटन की बात तो बहुत होती है...

लेकिन क्या सिर्फ़ सड़क बना देने से पर्यटन विकसित हो जाता है?

क्या हमारी जिम्मेदारी सिर्फ़ टिकट लेने तक सीमित है?

क्या सदियों पुरानी इन धरोहरों को संरक्षित करना हमारी प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?

अगर इन मंदिरों का उचित संरक्षण हो, जानकारी देने वाले बोर्ड लगें, नियमित साफ़-सफाई हो, सुरक्षा बढ़े और इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार मिले, तो रोहतासगढ़ किला बिहार ही नहीं, पूरे भारत के प्रमुख विरासत स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।

🙏 यह किसी सरकार की आलोचना नहीं, बल्कि हमारी साझा विरासत को बचाने की अपील है।

अगर आप भी चाहते हैं कि रोहतासगढ़ किला, चौरासन मंदिर और माँ पार्वती मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहें, तो इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर कीजिए।

शायद आपकी एक शेयर इस विरासत की आवाज़ उन लोगों तक पहुँचा दे, जो इसे बचा सकते हैं।

📍 रोहतासगढ़ किला, रोहतास, बिहार

😢 क्या आने वाली पीढ़ियाँ माँ पार्वती के इस प्राचीन मंदिर को सिर्फ़ तस्वीरों में ही देखेंगी...?रोहतासगढ़ किले के प्रसिद्ध...
04/07/2026

😢 क्या आने वाली पीढ़ियाँ माँ पार्वती के इस प्राचीन मंदिर को सिर्फ़ तस्वीरों में ही देखेंगी...?

रोहतासगढ़ किले के प्रसिद्ध चौरासन मंदिर के नीचे स्थित माँ पार्वती का यह प्राचीन मंदिर सदियों से इतिहास, आस्था और संस्कृति का मौन साक्षी बना खड़ा है।

लेकिन आज जब इस मंदिर को ध्यान से देखते हैं, तो दिल खुश नहीं... दुखी होता है।

टूटती हुई छत, समय की मार झेलती दीवारें और धीरे-धीरे अपनी चमक खोती यह धरोहर एक सवाल पूछ रही है...

क्या हम अपनी विरासत को बचाने के लिए बहुत देर तो नहीं कर रहे?

हम अक्सर हजारों किलोमीटर दूर स्थित ऐतिहासिक इमारतों की चर्चा करते हैं, लेकिन अपने ही बिहार की ऐसी अमूल्य धरोहरें हमारी आँखों के सामने समय के साथ कमजोर होती जा रही हैं।

यह सिर्फ़ एक मंदिर नहीं...
यह उन कारीगरों की मेहनत है, जिन्होंने बिना आधुनिक मशीनों के पत्थरों में आस्था को जीवित कर दिया।

अगर समय रहते उचित संरक्षण और नियमित देखभाल नहीं हुई, तो नुकसान बढ़ता जाएगा। इतिहास एक दिन में नहीं टूटता... वह हर बारिश, हर गर्मी और हर उपेक्षा के साथ थोड़ा-थोड़ा बिखरता है।

🙏 अगर आप भी मानते हैं कि रोहतासगढ़ किले की ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण होना चाहिए, तो इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाइए।

शायद आपकी एक शेयर इस विरासत की आवाज़ किसी जिम्मेदार व्यक्ति तक पहुँचा दे।

📍 माँ पार्वती मंदिर, चौरासन मंदिर परिसर, रोहतासगढ़ किला, रोहतास, बिहार

😨 रोहतासगढ़ किले में एक ऐसी जगह भी है... जिसका नाम सुनते ही आज भी लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं — "फाँसी घर"।पहाड़ की...
04/07/2026

😨 रोहतासगढ़ किले में एक ऐसी जगह भी है... जिसका नाम सुनते ही आज भी लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं — "फाँसी घर"।

पहाड़ की खड़ी चट्टानों के किनारे बना यह विशाल बुर्ज सदियों से न जाने कितनी कहानियों को अपने भीतर समेटे खड़ा है।

स्थानीय लोग इसे "फाँसी घर" के नाम से जानते हैं। लोककथाओं के अनुसार, कभी यहाँ गंभीर अपराधियों या राजद्रोहियों को मृत्युदंड दिया जाता था। हालांकि, इस बात का कोई स्पष्ट ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह स्थान वास्तव में किले की सुरक्षा के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण सैन्य बुर्ज (Defensive Bastion) भी हो सकता है।

लेकिन जब आप इस जगह पर खड़े होते हैं...

चारों ओर सैकड़ों फीट गहरी खाइयाँ, विशाल पत्थर की प्राचीरें और दूर-दूर तक फैली घाटियाँ देखकर सहज ही एहसास होता है कि रोहतासगढ़ किला अपने समय में कितना अभेद्य और शक्तिशाली रहा होगा।

आज अफसोस इस बात का है कि...

जहाँ कभी सैनिकों की निगाहें दुश्मनों पर रहती होंगी, वहाँ अब समय की मार साफ़ दिखाई देती है। कई हिस्सों से पत्थर टूट रहे हैं, दीवारों पर पेड़-पौधे उग आए हैं और सदियों पुरानी यह धरोहर धीरे-धीरे अपनी पहचान खोती जा रही है।

इतिहास सिर्फ़ किताबों में नहीं मिलता...
वह ऐसी ही जगहों पर ज़िंदा रहता है।

अगर हमने समय रहते रोहतासगढ़ किले की इन ऐतिहासिक संरचनाओं का संरक्षण नहीं किया, तो आने वाली पीढ़ियाँ इन्हें सिर्फ़ तस्वीरों में देखेंगी।

🙏 अगर आप भी मानते हैं कि बिहार की इस विश्वस्तरीय धरोहर को बचाया जाना चाहिए, तो इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर कीजिए।

💬 वैसे... अगर आपको मौका मिले, तो क्या आप इस "फाँसी घर" को अपनी आँखों से देखना चाहेंगे?

📍 स्थानीय रूप से "फाँसी घर" के नाम से प्रसिद्ध स्थल, रोहतासगढ़ किला, रोहतास, बिहार

🚨 क्या आने वाले कुछ वर्षों में रोहतासगढ़ किले का यह ऐतिहासिक दरवाज़ा सिर्फ़ तस्वीरों में रह जाएगा...?यह है रोहतासगढ़ किल...
04/07/2026

🚨 क्या आने वाले कुछ वर्षों में रोहतासगढ़ किले का यह ऐतिहासिक दरवाज़ा सिर्फ़ तस्वीरों में रह जाएगा...?

यह है रोहतासगढ़ किले का पहला प्रवेश द्वार, जो रेहल गाँव से लगभग 6 किलोमीटर आगे स्थित है। यहीं से शुरू होता है उस दुर्ग का सफर, जिसे भारत के सबसे दुर्गम और विशाल किलों में गिना जाता है। इस दरवाज़े से आगे लगभग 7–8 किलोमीटर का पहाड़ी रास्ता तय करने के बाद रोहतासगढ़ किले का मुख्य परिसर शुरू होता है।

लेकिन अफसोस की बात यह है कि सदियों से आंधी, बारिश और समय की मार झेलने वाला यह दरवाज़ा अब धीरे-धीरे अपनी पहचान खोता जा रहा है।

आज इसकी दीवारों से पत्थर टूट रहे हैं, कई हिस्सों में दरारें दिखाई देने लगी हैं और हर मानसून इसके लिए एक नई चुनौती लेकर आता है। अगर समय रहते इसका वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ शायद इस ऐतिहासिक धरोहर को सिर्फ़ पुरानी तस्वीरों और किताबों में ही देख पाएँगी।

यह सिर्फ़ ईंट और पत्थरों का बना दरवाज़ा नहीं है...
यह उन हजारों कदमों का गवाह है, जिन्होंने सदियों तक इस किले की ओर अपना सफर तय किया।

इतिहास अपने आप नहीं बचता... उसे बचाना पड़ता है।

अगर आप भी मानते हैं कि रोहतासगढ़ किला और इसकी धरोहरों का संरक्षण होना चाहिए, तो इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाइए। शायद आपकी एक शेयर से किसी जिम्मेदार व्यक्ति तक यह आवाज़ पहुँच जाए।

📍 पहला प्रवेश द्वार, रोहतासगढ़ किला, रोहतास, बिहार

🔄 360° में इस तस्वीर को एक बार ज़रूर घुमाइए...यकीन मानिए, कुछ पल के लिए आपको ऐसा लगेगा जैसे आप खुद रोहतास की इन हरी-भरी ...
03/07/2026

🔄 360° में इस तस्वीर को एक बार ज़रूर घुमाइए...

यकीन मानिए, कुछ पल के लिए आपको ऐसा लगेगा जैसे आप खुद रोहतास की इन हरी-भरी पहाड़ियों के बीच खड़े हों।

यह नज़ारा है बिहार के सासाराम (रोहतास) में स्थित मांझर कुंड जाने वाले रास्ते का। पिछले मानसून में यहाँ इतनी भीड़ थी कि कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया था। लोग घंटों सिर्फ़ इस खूबसूरत झरने तक पहुँचने के लिए इंतज़ार कर रहे थे।

लेकिन इस साल तस्वीर कुछ अलग है...

मानसून की रफ्तार धीमी रही है और जून में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई। बारिश की कमी का असर सिर्फ़ झरनों पर नहीं पड़ता, बल्कि खेतों पर भी दिखाई देता है। धान की रोपाई देर से शुरू होती है, कई किसान सिंचाई के लिए डीज़ल पंप पर निर्भर हो जाते हैं और खेती की लागत बढ़ जाती है। अगर समय पर अच्छी बारिश न हो, तो सबसे बड़ा बोझ किसान के कंधों पर ही आता है।

उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मानसून पूरी तरह सक्रिय होगा और रोहतास की यही पहाड़ियाँ फिर से बादलों, झरनों और हरियाली से भर उठेंगी।

📱 तब तक 360° में इस पूरे नज़ारे को घुमाकर देखिए...
शायद अगली बार यही रास्ता फिर से हजारों पर्यटकों से गुलज़ार दिखाई दे।

💬 क्या आपने कभी मानसून में मांझर कुंड का सफर किया है? अपना अनुभव कमेंट में ज़रूर बताइए।

📍 मांझर कुंड, सासाराम, रोहतास, बिहार

360° में घुमाकर देखिए... बिहार के औरंगाबाद की उमगा पहाड़ियों पर सदियों से खड़ा एक ऐसा सूर्य मंदिर, जिसके बारे में आज भी ...
03/07/2026

360° में घुमाकर देखिए... बिहार के औरंगाबाद की उमगा पहाड़ियों पर सदियों से खड़ा एक ऐसा सूर्य मंदिर, जिसके बारे में आज भी बहुत कम लोग जानते हैं। 🛕☀️

पहली नज़र में आपको सिर्फ़ एक प्राचीन मंदिर दिखाई देगा, लेकिन जैसे-जैसे आप इस 360° तस्वीर को घुमाएंगे, आपको महसूस होगा कि यह सिर्फ़ पत्थरों से बनी एक इमारत नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और अद्भुत शिल्पकला का जीवंत प्रमाण है।

बिहार के औरंगाबाद ज़िले की उमगा पहाड़ी पर स्थित उमगा सूर्य मंदिर अपनी विशाल ग्रेनाइट शिलाओं, बारीक नक्काशी और अनोखी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। इतिहासकारों का मानना है कि यह क्षेत्र कभी उमगा राज का महत्वपूर्ण केंद्र था, और इसी कारण यह पहाड़ी सदियों से धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है।

स्थानीय लोगों के बीच एक मान्यता आज भी प्रचलित है कि कभी उमगा की इन पहाड़ियों में मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों को तराशने का बड़ा केंद्र हुआ करता था। यद्यपि इसका स्पष्ट ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन आज भी यहाँ बिखरे विशाल शिलाखंड और प्राचीन पत्थर उस लोककथा को और भी रहस्यमयी बना देते हैं।

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि समय, मौसम और सदियों के बदलाव के बावजूद यह आज भी उसी भव्यता के साथ पहाड़ी की चोटी पर खड़ा है, मानो अपने गौरवशाली अतीत की कहानी स्वयं सुना रहा हो।

📱 अब आपकी बारी...
इस 360° तस्वीर पर क्लिक कीजिए, अपने फोन को चारों ओर घुमाइए और कुछ पलों के लिए खुद को उमगा सूर्य मंदिर की पहाड़ी पर खड़ा महसूस कीजिए। हर दिशा में एक नया दृश्य आपका इंतज़ार कर रहा है।

💬 क्या आपने पहले कभी उमगा सूर्य मंदिर के दर्शन किए हैं? अगर हाँ, तो अपना अनुभव कमेंट में ज़रूर साझा करें।

📍 उमगा सूर्य मंदिर, मदनपुर, औरंगाबाद, बिहार

🚩 भारत में एक ऐसा शिवलिंग... जो साल के लगभग 8 महीने पानी में डूबा रहता है। और मान्यता है कि इसकी स्थापना स्वयं लंकापति र...
02/07/2026

🚩 भारत में एक ऐसा शिवलिंग... जो साल के लगभग 8 महीने पानी में डूबा रहता है। और मान्यता है कि इसकी स्थापना स्वयं लंकापति रावण ने की थी।

ज़्यादातर लोग काशी, केदारनाथ और बैद्यनाथ धाम के बारे में जानते हैं, लेकिन बिहार के रोहतास जिले में स्थित दशशीशनाथ महादेव के बारे में बहुत कम लोगों ने सुना होगा।

📍 स्थान: बाँदू गांव, नौहट्टा, रोहतास (बिहार)

सोन नदी के बीचों-बीच चट्टानों पर विराजमान यह प्राचीन शिवलिंग आज भी रहस्य, आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम है।

मान्यता है कि दशानन रावण, जो भगवान शिव का सबसे बड़ा भक्त माना जाता है, उसने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। इसी कारण इसका नाम पड़ा दशशीशनाथ महादेव।

कहा जाता है कि जब रावण भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहा था, उसी समय सहस्त्रबाहु (कार्तवीर्य अर्जुन) ने अपनी हजारों भुजाओं से सोन नदी का प्रवाह रोक दिया। जल न मिलने पर दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ। यह कथा पुराणों और स्थानीय लोक परंपराओं में आज भी सुनाई जाती है। हालांकि इसका ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन सदियों से स्थानीय लोगों की आस्था इससे जुड़ी हुई है।

सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि...

🌊 यह शिवलिंग साल के लगभग 8 महीने सोन नदी के पानी में डूबा रहता है।

जब गर्मियों में नदी का जलस्तर घटता है, तब कुछ महीनों के लिए यह दिव्य शिवलिंग फिर से दर्शन देता है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

यह कोई भव्य मंदिर नहीं...
न ही यहां सोने-चांदी की सजावट है...
फिर भी यहां पहुंचकर जो शांति महसूस होती है, वह शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

आज भी यहां पहुंचना आसान नहीं है। नदी का रास्ता, चट्टानें और बदलता जलस्तर इस यात्रा को रोमांचक बना देते हैं। शायद यही कारण है कि यह स्थान अभी भी भीड़ से दूर और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ सुरक्षित है।

दुख की बात यह है कि...
इतना महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थल होने के बावजूद, दशशीशनाथ महादेव आज भी राष्ट्रीय स्तर पर वह पहचान नहीं बना पाया जिसके वह वास्तव में हकदार है।

अगर इस स्थान का सही तरीके से संरक्षण और प्रचार किया जाए, तो यह रोहतास ही नहीं, पूरे बिहार के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है।

❤️ अगर आपने पहले कभी इस जगह का नाम नहीं सुना था, तो इस पोस्ट को ज़रूर शेयर करें ताकि भारत के इस अनोखे शिवधाम के बारे में अधिक से अधिक लोग जान सकें।

📍 दशशीशनाथ महादेव
बाँदू, नौहट्टा, रोहतास, बिहार

हर हर महादेव! 🔱

नोट: रावण द्वारा शिवलिंग स्थापना और सहस्त्रबाहु से युद्ध की कथा स्थानीय धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। इसे ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित घटना नहीं माना जाता।

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