14/09/2026
|| हनुमान अंश: धर्म एवं आस्था की स्वच्छ झाँसी ||
भारतीय आस्था के प्रति फिल्मकारों में अब जाकर एक ऐसी समझ विकसित हुई है कि जिससे वह धर्म को धंधा और पाखंड नहीं कहते । वे हर घटना को तर्क और विज्ञान की कसौटी पर नहीं कसते । अब आकर माना जाने लगा है कि धार्मिक आस्था और श्रद्धा की जो धारा आदियुग से अब तक निरंतर प्रवाहित हो रही है उसमें तर्क-विज्ञान से नहीं, अपितु भक्ति-भावना से डुबकी लगाने वाला ही अलौकिक रहस्य का साक्षात्कार कर पाता है।
मेरी भाँति ही बहुत से लोग होंगे जिनको केवल ऐसी movies देखने में रुचि होगी जो science fiction, disaster management, historical, और social issues पर आधारित होती हैं। रामायण और महाभारत जैसे धार्मिक और आध्यात्मिक चलचित्रों के अलावा मैंने धार्मिक जुड़ाव वाला अन्य कोई चलचित्र नहीं देखा परन्तु श्री श्री १००८ नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित यह चलचित्र जिज्ञासा, निश्छलता , रहस्य, प्रकृति प्रेम, साधना, पवित्रता, औदार्यता, कृपा और अज्ञेय (ईश्वर) से एकाकार का जीवन्त चित्रण कर रहा है।
श्री श्री १००८ नीम करौली बाबा के चमत्कार सर्वविदित हैं परंतु मैंने यह चलचित्र देखते हुए जाना कि नीम करौली बाबा ने कभी अपनी पारलौकिक शक्तियों के प्रति गर्व और हर्ष का भाव व्यक्त नहीं किया बस सरल और सहज बने रहे।
2 करोड़ से लगभग 200 करोड़ की यात्रा करने वाली यह फिल्म हर दर्शक पर एक सम्मोहन डाल रही है। बात वही है कि “ जाकी रही भावना जैसी ” जो भक्त हैं उन्हें बाबा की भक्ति मोह रही है, जो साधक हैं उन्हें योग साधना लुभा रही है। इस फिल्म के बहुत दृश्यों पर बहुत लोगों ने वार्ता की है परंतु मुझे viral scence के अतिरिक्त दो दृश्य अद्भुत लगे और एक अंतिम दृश्य ने रोमांच से भर दिया।
पहला दृश्य जब बालक की अपने गुरु से योग साधना पर चर्चा होती है और वह मूलाधार पर ध्यान केंद्रित करने को कहते हैं। लक्ष्मीनारायण १३ वर्ष के बालक हैं और उनकी इस तरह की कठिन साधना प्रेरणा और रोमांच से भरती है।
और दूसरा दृश्य पूर्णानन्द तिवारी को भयमुक्त करने वाला है। जब पूर्णानन्द तिवारी हनुमान चालीसा पढ़ते हैं और फिल्म में जिस भाँति यह दृश्य दिखाया गया है, अद्भुत है। इसमें नाम-जप की शक्ति को प्रदर्शित किया गया है। जो व्यक्ति धर्म और आस्था को तर्क की कसौटी पर कसते हैं उन्हें एक बार ‘हनुमान अंश’ देखनी चाहिए।
||राम राम||
हारे को हरिनाम-अधारा देते हैं।
भव-सागर के पार किनारा देते हैं।
जिनको रघुवर दर्शन की अभिलाषा है;
उनको श्री हनुमान सहारा देते हैं।