Sheopur diary

Sheopur diary श्योपुर की एतिहासिक एवं प्राकृतिक सौन्दर्य की एक झलक

पुराने नैरोगेज ट्रैक पर घने जंगल के बीच दुर्गापुरी माता मंदिर है। इस मंदिर का इतिहास पांडवों के समय का बताया जाता है। इस...
19/11/2025

पुराने नैरोगेज ट्रैक पर घने जंगल के बीच दुर्गापुरी माता मंदिर है। इस मंदिर का इतिहास पांडवों के समय का बताया जाता है। इसकी प्रमाणिकता इससे भी प्रतीत होती है कि इससे थोड़ी ही दूर फूलदा गांव और पास स्थित झरने में दस हजार साल पुरानी रॉक पेंटिंग और चित्र भी मिले हैं, रॉक पेंटिंग से एक प्राचीन नगर होने की प्रमाणिकता होती है और उसी से यह किवदंती भी सटीक लगती है कि यहां प्राचीनकाल मे कोई दैवीय मंदिर या चमात्कार रहा, जिसकी खोज करीब 90 साल पहले शिवनारायण पराशर ने की थी, जिन्हें डांगवैल बाबा के नाम से भी जाना जाता है।

440 साल पूर्व रामानुजाचार्य सम्प्रदाय द्वारा बनाए गए भगवान लक्ष्मीनारायण मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के लिए जिस जगह हवन कुं...
20/04/2025

440 साल पूर्व रामानुजाचार्य सम्प्रदाय द्वारा बनाए गए भगवान लक्ष्मीनारायण मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के लिए जिस जगह हवन कुंड बना था उसी जगह पर टोडी गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना की गई थी.

श्योपुर का धनायचा जैन मंदिर: एक ऐतिहासिक विरासत 🏛️इतिहास और स्थापना:मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के घनघोर जंगलों में स्थि...
16/04/2025

श्योपुर का धनायचा जैन मंदिर: एक ऐतिहासिक विरासत 🏛️

इतिहास और स्थापना:
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के घनघोर जंगलों में स्थित धनायचा एक प्राचीन बस्ती है, जिसका नाम "धनिकों की बस्ती" से प्रेरित है। लगभग 800 वर्ष पूर्व, जब इस क्षेत्र में कच्छपघात राजवंश का शासन था, सरावगी वणिक समुदाय ने यहां एक भव्य जैन मंदिर का निर्माण करवाया। यह मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता है।

मंदिर की विशेषताएं और वास्तुकला:
इस मंदिर की सबसे विशिष्ट विशेषता है इसकी दो चौबीसी, जिनमें जैन तीर्थंकरों की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। मंदिर के गर्भगृह में एक विशाल पार्श्वनाथ प्रतिमा विराजमान है, जो स्थानीय चट्टान को तराशकर बनाई गई है। यह कलाकृति दर्शकों को चमत्कृत करती है और प्राचीन भारतीय मूर्तिकला का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।

स्थानीय विश्वास और परंपराएं:
स्थानीय सहरिया जनजाति के लोग मंदिर की मुख्य प्रतिमा को धन्नासेठ की प्रतिमा के रूप में पूजते हैं। मंदिर से नीचे नाले में एक विशाल अनगढ़ प्रतिमा पड़ी है, जिसे उसकी विशालता के कारण स्थानीय लोग 'दानव' के नाम से जानते हैं।

वर्तमान स्थिति और चुनौतियां:
मंदिर की स्थिति अत्यंत दुर्गम है। घने जंगलों में स्थित होने के कारण यहां तक पहुंचना काफी कठिन है। बिना स्थानीय मार्गदर्शन के यहां पहुंचना लगभग असंभव है। इस कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बहुत कम है।

विकास की संभावनाएं:
यदि शासन द्वारा यहां तक उचित सड़क मार्ग का निर्माण किया जाए और मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाए, तो इस स्थल को एक महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। यह न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा, बल्कि प्राचीन जैन धर्म की इस अमूल्य विरासत का संरक्षण भी सुनिश्चित करेगा।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व:
धनायचा का जैन मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह प्राचीन भारतीय कला, वास्तुकला और संस्कृति का एक जीवंत प्रमाण भी है। यह मंदिर जैन धर्म के महत्वपूर्ण सिद्धांतों - अहिंसा, शांति और आध्यात्मिकता का प्रतीक है।

शैक्षणिक और अनुसंधान महत्व:
यह स्थल प्राचीन भारतीय वास्तुकला, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है।

Is map me aapko sheopur ke kaun kaun se gaav dikhte hai
31/03/2025

Is map me aapko sheopur ke kaun kaun se gaav dikhte hai

पालपुर किले का निर्माण संभवतः करौली के राजा गोपालसिंह द्वारा कराया गया था। इस किले प्राकृतिक सुरक्षा कूनो नदी से प्राप्त...
23/03/2025

पालपुर किले का निर्माण संभवतः करौली के राजा गोपालसिंह द्वारा कराया गया था। इस किले प्राकृतिक सुरक्षा कूनो नदी से प्राप्त है। इसके बाद सुरक्षार्थ एक ऊँची प्राचीर है।जिसमे बुर्ज बने हुए है। किले के दो प्रवेश द्वार है । यह किला दो मंजिला है। किले के अंदर एक आयताकार भवन ऊंचे प्लेटफॉर्म पर बना हुआ है। इसमें नक्कासीदार सजावट की गई है। यह रामजानकी मंदिर है। यह इस ठिकानेदारों का पूजा घर है। किले के अंदर दायीं ओर आयताकार दो मंजिला इमारत है। जिसकी अब एक ही मंज़िल शेष है। यह पालपुर के शासकों का दरबार हाल अथवा कचहरी है। कचहरी के सामने एक बड़ा प्लेटफार्म बना है , जिस पर यहाँ के जागीरदार कचहरी लगाते समय बैठते होंगे। इस का निर्माण राजपुताना शैली में किया गया है। अब यह किला या गढ़ी कूनो नेशनल पार्क का हिस्सा है। यहाँ से कूनो नदी और कूनो घाटी का शौन्दर्य देखते ही बनता है।

श्योपुर-खातौली मार्ग से लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित ग्राम नीमोदापीर में कई सदियों से एक परिसर के एक हिस्से में शिवालय ब...
23/03/2025

श्योपुर-खातौली मार्ग से लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित ग्राम नीमोदापीर में कई सदियों से एक परिसर के एक हिस्से में शिवालय बना हुआ है तो उसी परिसर के दूसरे हिस्से में एक फकीर बाबा की मजार भी बनी हुई है। लेकिन कभी दोनों धर्मों के श्रद्धालुओं में सांप्रदायिक द्वेष की भावना नहीं आई। बताया गया है कि अजमेर के ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती लगभग शांति और अमन का संदेश देते हुए अपने अनुयायियों के साथ श्योपुर क्षेत्र में आए और यहां शिवालय के परिसर में रुके थे। हांलाकि ख्वाजा चिश्ती तो चले गए, लेकिन एक फकीर वहीं रह गए और उनके इंतकाल के बाद शिवालय के दूसरे हिस्से में उनकी मजार बनाई। तभी से मजार और शिवालय में एक साथ पूजा अर्चना का दौर चलता है और कभी कोई अड़चन नहीं आई। बताया गया है कि जब अजमेर में ख्वाजा का उर्स भरता है, उसी समय नीमोदा पीर में भी उर्स का आयोजन होता है। विशेष बात यह है कि दरगार की सेवा पूजा भी एक हिंदू परिवार ही करता है।

श्योपुर जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूरी  पर जन आस्था केंद्र सिरोनी बालाजी देवस्थान
06/03/2025

श्योपुर जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूरी पर जन आस्था केंद्र सिरोनी बालाजी देवस्थान

शहर से करीब 55 किमी दूर गोरस-श्योपुर मार्ग पर स्थित डोबकुंड का अपना गौरवशाली इतिहास है। यहां 8 से 10 हजार साल पूर्व आदिम...
02/03/2025

शहर से करीब 55 किमी दूर गोरस-श्योपुर मार्ग पर स्थित डोबकुंड का अपना गौरवशाली इतिहास है। यहां 8 से 10 हजार साल पूर्व आदिमानव के द्वारा बनाए गए शैलाश्रय, शैलचित्र और प्रतिमाएं आज भी अद्वितीय हैं।

10वीं-11वीं शताब्दी में डोब कच्छपघात राजाओं की राजधानी रहे डोब में संवत् 1045 मे विक्रम सिंह कच्छापघात द्वारा बनाए गए जैन मंदिर, हरगौरी मंदिर तथा अन्य मंदिरों के भाग्नावशेष आज भी लोगों को बरबस ही आकर्षित कर लेते हैं। जानकारों के मुताबिक यहां दो कुंड हैं जिनमें हमेशा पानी रहता है जिस वजह से इस जगह का नाम डोब पड़ा। इसके संरक्षण के लिए कई बार योजनाएं बनाई गईं लेकिन प्रशासन की उपेक्षा के चलते यह संपदा धूलधरसित होने के साथ इसके अस्तित्व पर भी संकट नजर आने लगा है।

08/02/2025

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! मेरे नए फ़ॉलोअर्स का स्वागत है! आपसे जुड़ना मेरे लिए खुशी की बात है! Dhirendra Meena, Suchi Garg, Kuldeep Jat, Jagdish Mëena, श्रीओम सिंह परमार मृगपुरा, Imran Khilji, Guddu Manihar, Suresh Malaee, धनराज यादव, Pawan Sangat, Brijmohan Mahour, Meetalal Meena Meetalal Meena, Utd Tad, Narendra Gujar Chogalal, Sohil Khan Khan, Rekha Mangal, Babulal Prajapati, Sultan Khan, Lekhraj Meena, प्रॉपर्टी डीलर श्योपुर

Shivpur mein ab aisi purani imaraton ka khatma Sa hota ja raha hai vyaparik pratishthan banane ke liye purani haveli aur...
11/01/2025

Shivpur mein ab aisi purani imaraton ka khatma Sa hota ja raha hai vyaparik pratishthan banane ke liye purani haveli aur bhavno Ko khatam Kiya ja raha hai kya aise hi in khubsurat yadon ko khatm kar diya jaega..

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