09/12/2016
रोडवेज का माफिया कॉन्ट्रैक्ट-कई बार खबरें पढ़ने को मिलती हैं, उसे कल खुद अनुभव किया। सुबह #दिल्ली जाने की ट्रेन छूट गयी तो बस से दिल्ली को चला, उत्तराखण्ड परिवहन की बस थी।उस जर्जर, खटारा और खराब बस में यात्रा अलग अनुभव था। मंगलौर में खराब हुयी, फिर बीस की स्पीड पर मैकेनिक खोजते आगे बढ़ी, मेकैनिक मिला फिर 2 घण्टे में आगे बढ़ी और #खतौली बायपास के एक ढाबे पर खड़ी हो गयी।
कहानी अब शुरू होती है। ढाबे के हालत देख सवारियों ने कहीं और रोकने को कहा, कंडक्टर ने #हरयाणवी टाइप भाषा में टका सा जवाब दिया कि यहीं रुकेगी। परिवहन निगम द्वारा अनुबन्धित ये ढाबा आतंक का अड्डा था। पेशाबघर पूछा जवाब मिला पीछे खेत हैं , महिला शौचालय था,उसे प्रयोग करने पर सफाईकर्मी महिलाओं से झगड़ कर पैसे मांग रहा था। चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, बिस्कुट, मिनरल वाटर छपे मूल्य से सीधे पांच से दस रुपये ज्यादा। अगर कोई यात्री विरोध जताता तो चार छः मुस्टंडे लड़ने को तैयार। तभी एक परिवार वेटर उलझा हुआ था, बोला जब प्याज माँगा ही नहीं तो साठ रूपये किस बात के। एक यात्री ने आलू में बदबू आने की बात कही तो तो मुस्टंडों ने कहा कि पैसे तो देने पड़ेंगे। बात बढ़ी तो सभी काउन्टरों से ढाबा कर्मचारी उस टेबल पर पँहुच गये। परिवार के साथ बैठे यात्री को पैसे देने पड़े प्याज के साठ भी। खाने से पहले दाम कुछ बाद में कुछ।
भय, कोहराम, कोलाहल, खुली गुंडा गर्दी के वातावरण में लोगों ने चालीस मिनट काटे। कुछ ने बस में बैठे रहना ही उचित समझा। पास ही मोगा पंजाबी नाम का शानदार रेस्तराँ था जब कुछ लोगों ने उधर का रूख किया तो कंडक्टर ने कहा अपने रिस्क पर जाओ, छूट जाओगे तो अपनी जिम्मेदारी नहीं।
बस संख्या UK07 PA1553 थी, बस में अन्दर दो फोन नम्बर लिखे थे पहला नम्बर रोडवेज शिकायत-सहायता का 8476007606 और दूसरा एजीएम रोडवेज का नम्बर 8476007505 लिखा था। शिकायत वाला फोन लगातार व्यस्त था और एजीएम का उठा नहीं।
आखिर ढाबा मालिक की गुंडागर्दी की संरक्षक सरकार ही तो है । कितना धन हर महीने विभाग के अधिकारियों को ऐसे ढाबों से मिलता होगा। लाखों यात्रियों की सुविधा,सम्मान और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है कौन इस सिंडिकेट का मुखिया है। इस लड़ाई को भी लड़ा जायेगा। जरूर करें।।
Source- DainikUttarakhand