25/03/2026
#मेरेअधूरेवार्तालाप
कली, अचानक से घबरा के उठ बैठी
जैसे, कोई उसे घूर रहा हो।
ऊपर देखा तो सिर्फ तारे ही तारे
दूर कहीँ झरने से आ रहा था
अनवरत सँगीत
कुछ कीटों के गीत, साथ में ।
पर फिर भी,
कली को ड़र था कि कहीं तो कोई है।
बगल सोये पुष्प को देखा
बेसुध सो रहा था
मुख पर मधुमक्खियों के दाँत के निशान
और पक्षियोँ के चोंच के भी
उसकी चोटिल पंखुडियों को देखकर
कली को और दुख हुआ
और वो नीचे देखने लगी
घास की तरफ
फिर धीरे से खुशफुसा के बोली
घास ! क्या कोई आया था ?
घास ने कहा, ‘नहीँ’।
कली ने पुनर्निवेदन किया,
कोई तो है जरा चारों ओर देखो।
घास ने घुटी आवाज में उत्तर दिया,
नहीं! मैं नहीं हिलुँगी ।
मुझे एकत्र करनी है ओष की बूँदे
अपनी मिट्टी के लिये, अपने लोगों के लिए ।
सहमी हुई कली ने पत्तों की तरफ देखा
और बुद्बुदायी, ‘ इन नटखट पत्तियों से तो पूछना ही बेकार है।
तभी, नजदीक के एक अधपके पत्ते ने लगभग डाटकर बोला,
सो जा बहन और हमको भी सोने दे
हम पत्तों को दिन में बहुत सारी प्राणवायु बनानी है।
देखा नहीं तुमने
सारे मनुष्यों का दम घुट रहा है
सब खांस रहे हैं, छाती पकड़ के
तभी, बूढ़े तने ने आवाज़ दी
‘बेटी !’
कली बोली,
बाबा, मैनें सपना देखा।
बगल गाँव से क्र्न्दन की आवाज आती है।
तना बोला, तू डर मत। वो इस जीव शृँखला का राजा है
निकाल लेगा शत्रु की आँख
हमे बस उसे प्राणवायु (ओक्सिजन) देनी है।
चल, सो जा।
इस शोरगुल में शायद पुष्प की आँखे थोड़ा खुली होंगी
मंद पवन सुगंध से भर गयी थी
कली वापस सो गयी थी।