18/02/2026
दहेज की आग में ठंडी फुहार: सतलोक आश्रम सोजत में, 20 जोड़ों ने रचाई दहेज मुक्त शादी
लाखों के कर्ज़ से मुक्ति: जहां बिना दहेज मात्र 17 मिनट में बनते हैं सात जन्मों के बंधन
आज के इस कलयुगी दौर में जहाँ शादी महँगे होटलों, बैंड-बाजे और दहेज की लिस्ट तक सीमित होती जा रही है, वहीं राजस्थान के सतलोक आश्रम (सोजत, जिला पाली) से एक सकारात्मक और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है।
संत रामपाल जी महाराज के 39वें बोध दिवस के पावन अवसर पर सोमवार, 16 फरवरी 2026 को 20 जोड़ों का दहेज मुक्त सामूहिक विवाह (रमेणी) संपन्न हुआ। यह सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली एक शांत क्रांति है।
यह विवाह पद्धति, जिसे "रमैणी" कहा जाता है, केवल 17 मिनट में संपन्न होती है। इसमें न तो दहेज का लेन-देन होता है, न तिलक की रस्म, न ही बैंड-बाजे का शोर। वर-वधू साधारण वस्त्रों में, गुरुवाणी के माध्यम से पवित्र बंधन में बंधते है।
दहेज प्रथा ने वर्षों से समाज में असमानता को बढ़ावा दिया है। एक सामान्य परिवार के लिए बेटी की शादी आर्थिक चिंता और कर्ज का कारण बन जाती है। संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रेरित यह मॉडल बताता है कि विवाह कोई व्यापार या प्रतिष्ठा का प्रदर्शन नहीं, बल्कि दो आत्माओं का पवित्र संस्कार है।
समारोह में शामिल परिवारों ने साफ कहा कि रिश्ते पैसों से नहीं, विश्वास और संस्कारों से मजबूत होते हैं। सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि दहेज जैसी कुरीति को खत्म करने के लिए केवल कानून ही नहीं, बल्कि इस तरह की व्यवहारिक पहल भी जरूरी है।
एक सवाल: 17 मिनट की यह "रमेणी" शादी आज पूरे समाज से पूछ रही है— क्या विवाह की गरिमा खर्च से तय होगी, या संस्कार और समानता से?
यह पहल निश्चित रूप से एक बड़े सामाजिक परिवर्तन की ओर बढ़ता हुआ कदम है। सादगी ही सच्चा उत्सव है। दहेज मुक्त विवाह, सशक्त समाज की पहचान।