03/09/2026
*आईना रोज़ मुझसे पहले सी सूरत माँगे…*
मित्रों का दावा है कि समय ने मुझ पर मेहरबानी कर रखी है। “यार, तुम तो 40 साल पहले जैसे दिखते थे, आज भी बिल्कुल वैसे ही हो!” सुनकर किसी का भी सीना गजभर चौड़ा हो सकता है, और तारीफ किसे बुरी लगती है? पर सच कहूँ तो अब यह बात मुझे थोड़ी मज़ाकिया लगने लगी है।
तस्वीर में तो खैर आज भी मैं काफी हैंडसम लगता हूँ—कल ही मित्र ने एक तस्वीर खींची तो दिल किया कुछ लिखा जाए। पर हकीकत यह है कि जब लोग जवान दिखने का तमगा देते हैं, तो अंदर से 66 नंबर की उम्र अपनी मौजूदगी का अहसास करा देती है। मन ही मन हँसकर कहना पड़ता है—‘ग़ालिब दिल को बहलाने को ख़याल अच्छा है!’
इस उम्र का सबसे मज़ाकिया पहलू तब सामने आता है जब किसी क्रेडिट कार्ड कंपनी से किसी लड़की की खनकती, सुंदर आवाज़ फोन पर गूँजती है। मुझे कार्ड की रत्ती भर ज़रूरत नहीं होती, फिर भी आवाज़ को इज़्ज़त बख्शते हुए मैं मुस्कुराकर 'हाँ' कह देता हूँ। मैडम खुश होकर जब मेरी जानकारी का पिटारा खोलती हैं और मैं बड़े इत्मीनान से अपनी उम्र ‘66 साल’ बताता हूँ... बस!
उनकी आवाज़ की सारी मिठास नौ-दो-ग्यारह हो जाती है। मैं बातचीत थोड़ी और लंबी खींचना चाहता हूँ, पर उधर से फोन झटके से कट जाता है। ऐसे में कानों में गाने की पैरोडी गूँज उठती है—“चेहरा न देखो, उम्र पहचानो...”
फिर जब खुद अपनी तारीफें सुनकर आईने के सामने खड़ा होता हूँ, तो आईना बड़े दबे पाँव पास आकर धीरे से फुसफुसाता है—“रोज़ मुझसे पहले सी सूरत माँगे!”