Nafis Khan

Nafis Khan As two of art's major mediums, painting and photography are typically perceived as entirely independent practices.

A photograph has picked up a fact of life, and that fact will live forever-Raghu Rai
एक तस्वीर ने ज़िंदगी की एक सच्चाई को उठाया है, और वह सच्चाई हमेशा ज़िंदा रहेगी- रघु राय Though it is not uncommon for an artist to dabble in both brushwork and camerawork separately, some creatives even combine the crafts within the same piece

*आईना रोज़ मुझसे पहले सी सूरत माँगे…*मित्रों का दावा है कि समय ने मुझ पर मेहरबानी कर रखी है। “यार, तुम तो 40 साल पहले जै...
03/09/2026

*आईना रोज़ मुझसे पहले सी सूरत माँगे…*

मित्रों का दावा है कि समय ने मुझ पर मेहरबानी कर रखी है। “यार, तुम तो 40 साल पहले जैसे दिखते थे, आज भी बिल्कुल वैसे ही हो!” सुनकर किसी का भी सीना गजभर चौड़ा हो सकता है, और तारीफ किसे बुरी लगती है? पर सच कहूँ तो अब यह बात मुझे थोड़ी मज़ाकिया लगने लगी है।

तस्वीर में तो खैर आज भी मैं काफी हैंडसम लगता हूँ—कल ही मित्र ने एक तस्वीर खींची तो दिल किया कुछ लिखा जाए। पर हकीकत यह है कि जब लोग जवान दिखने का तमगा देते हैं, तो अंदर से 66 नंबर की उम्र अपनी मौजूदगी का अहसास करा देती है। मन ही मन हँसकर कहना पड़ता है—‘ग़ालिब दिल को बहलाने को ख़याल अच्छा है!’

इस उम्र का सबसे मज़ाकिया पहलू तब सामने आता है जब किसी क्रेडिट कार्ड कंपनी से किसी लड़की की खनकती, सुंदर आवाज़ फोन पर गूँजती है। मुझे कार्ड की रत्ती भर ज़रूरत नहीं होती, फिर भी आवाज़ को इज़्ज़त बख्शते हुए मैं मुस्कुराकर 'हाँ' कह देता हूँ। मैडम खुश होकर जब मेरी जानकारी का पिटारा खोलती हैं और मैं बड़े इत्मीनान से अपनी उम्र ‘66 साल’ बताता हूँ... बस!

उनकी आवाज़ की सारी मिठास नौ-दो-ग्यारह हो जाती है। मैं बातचीत थोड़ी और लंबी खींचना चाहता हूँ, पर उधर से फोन झटके से कट जाता है। ऐसे में कानों में गाने की पैरोडी गूँज उठती है—“चेहरा न देखो, उम्र पहचानो...”

फिर जब खुद अपनी तारीफें सुनकर आईने के सामने खड़ा होता हूँ, तो आईना बड़े दबे पाँव पास आकर धीरे से फुसफुसाता है—“रोज़ मुझसे पहले सी सूरत माँगे!”

“ये उन दिनों की बात है…”जब सुबह की शुरुआत मोबाइल की घंटी से नहीं,घर में चलती पत्थर की चक्की की आवाज़ से हुआ करती थी।आज क...
02/09/2026

“ये उन दिनों की बात है…”

जब सुबह की शुरुआत मोबाइल की घंटी से नहीं,
घर में चलती पत्थर की चक्की की आवाज़ से हुआ करती थी।
आज के बच्चे शायद पूछें—
“ये गोल पत्थर क्या है?”
और शायद हमें उन्हें बताना पड़ेगा कि
एक समय था जब रसोई में मशीनें नहीं,
हाथों की ताकत और धैर्य काम करते थे।
अनाज पिसता था तो सिर्फ आटा नहीं बनता था,
उसमें माँ के हाथों की मेहनत,
दादी की बातें और पूरे घर की खुशबू भी मिलती थी।
ये चीनी मिटटी से बनी बर्नियाँ
देखकर अभी भी मुंह में पानी आ गया
माँ इसमें आचार बनाया करती थीं
सामने रखी ये पुरानी चीज़ें शायद अब रोज़मर्रा की ज़रूरत नहीं रहीं…
लेकिन इन्हें देखकर लगता है—
चीज़ें पुरानी नहीं होतीं…
वे बस हमारे समय से बाहर चली जाती हैं।

खाली शाखों पर बैठी यह खामोशी भी बहुत कुछ कहती है,दूर रहकर भी एक ही दरख्त से जुड़ी दो रूहें रहती हैं
01/09/2026

खाली शाखों पर बैठी यह खामोशी भी बहुत कुछ कहती है,
दूर रहकर भी एक ही दरख्त से जुड़ी दो रूहें रहती हैं

यह तस्वीर जवाब नहीं चाहती।बस चाहती है कि हम कुछ पल रुकें… और सोचें। -----------वो सोच यहाँ  लिख सकतें हैं
31/08/2026

यह तस्वीर जवाब नहीं चाहती।
बस चाहती है कि हम कुछ पल रुकें… और सोचें। -----------वो सोच यहाँ लिख सकतें हैं

कुछ रिश्ते शब्दों से नहीं, सिर्फ़ एहसास से निभाए जाते हैं…आज इस पेड़ के सामने खड़े होकर लगा—जिसने हमें वर्षों तक छाँव दी...
29/08/2026

कुछ रिश्ते शब्दों से नहीं, सिर्फ़ एहसास से निभाए जाते हैं…

आज इस पेड़ के सामने खड़े होकर लगा—
जिसने हमें वर्षों तक छाँव दी,
जिसने चुपचाप हमारी साँसों में अपना हिस्सा दिया,
उसके सामने हाथ जोड़ना शायद सिर्फ़ प्रार्थना नहीं…
कृतज्ञता का सबसे सच्चा रूप है।

शहर चलता रहता है…किसी के लिए ये रोज़ की जंग है,किसी के लिए बस एक रास्ता,और किसी के लिए—जीने की मजबूरी।यही है हमारी रोज़म...
26/08/2026

शहर चलता रहता है…

किसी के लिए ये रोज़ की जंग है,
किसी के लिए बस एक रास्ता,
और किसी के लिए—जीने की मजबूरी।

यही है हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी।

DOST
22/08/2026

DOST

वो सफ़ाई करती रहीं…और पीछे लगी तस्वीरेंशहर की कहानी कहती रहीं।
21/08/2026

वो सफ़ाई करती रहीं…
और पीछे लगी तस्वीरें
शहर की कहानी कहती रहीं।

How to Click… 📷World Photography Day पर हम सब एक-दूसरे की तस्वीरें ले रहे थे।उसी दौरान मेरी नज़र शिल्पा देसाई जी पर ठहर ...
20/08/2026

How to Click… 📷

World Photography Day पर हम सब एक-दूसरे की तस्वीरें ले रहे थे।
उसी दौरान मेरी नज़र शिल्पा देसाई जी पर ठहर गई।

आप कैमरा कैसे थाम रही थीं,
उँगली किस तरह शटर तक पहुँच रही थी,
और उस एक क्लिक के लिए आपकी आँखों में जो एकाग्रता थी—
उसे देखकर लगा कि फोटोग्राफी सिर्फ कैमरा चलाना नहीं, उसे महसूस करना भी है।

मैंने बस उसी पल को क्लिक कर लिया…
और शायद अनजाने में आपकी तस्वीर में आपकी फोटोग्राफी के प्रति लगन भी कैद हो गई।

शिल्पा जी, यह तस्वीर आपके लिए—
आपकी उसी एकाग्रता और उस खूबसूरत “क्लिक” के नाम।

Happy World Photography Day Click 13 — वडोदरा  फोटो पत्रकारों  का तस्वीर प्रदर्शन  कैमरे से निकली तस्वीरें, दिल से जुड़ी...
19/08/2026

Happy World Photography Day

Click 13 — वडोदरा फोटो पत्रकारों का तस्वीर प्रदर्शन

कैमरे से निकली तस्वीरें, दिल से जुड़ी कहानियां

वडोदरा के ऐतिहासिक कीर्ति मंदिर स्थित आकृति आर्ट गैलरी में एक ऐसा आयोजन हुआ, जहां तस्वीरें सिर्फ तस्वीरें नहीं थीं, बल्कि शहर की धड़कन, लोगों की कहानियां और समय की यादें बनकर सामने आईं। फोटोजर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ वडोदरा द्वारा आयोजित ‘Click 13’ एग्जिबिशन का उद्घाटन बेहद गरिमापूर्ण और भावनात्मक माहौल में हुआ।

इस प्रदर्शनी में वडोदरा के फोटोजर्नलिस्टों द्वारा अपने कैमरे में कैद किए गए ऐसे अनगिनत पल प्रदर्शित किए गए, जो कभी खबर बने, कभी इतिहास का हिस्सा और कभी किसी इंसान की जिंदगी की अनमोल याद।

फोटोजर्नलिस्ट की नजर सिर्फ कैमरे के लेंस तक सीमित नहीं होती। वह समाज को देखता है, महसूस करता है और फिर एक तस्वीर के जरिए उस पल को हमेशा के लिए अमर कर देता है। Click 13 इसी समर्पण, संवेदना और साहस का सम्मान है।

इस खास मौके पर वडोदरा के महाराजा समरजीत सिंह गायकवाड भी उपस्थित रहे और उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए अपने अनुभव साझा किए। उनके साथ वडोदरा के म्युनिसिपल कमिश्नर अरुण महेश बाबू, मेयर गीता मकवाना, कांग्रेस अध्यक्ष ऋत्विज जोशी, भाजपा नेता डॉ विजय शाह, कांग्रेस नेता अमी रावत, इस्कॉन मंदिर के उपाध्यक्ष नित्यानंद स्वामी, एडवोकेट हितेश गुप्ता स्थायी समिति अध्यक्ष वर्षा व्यास सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

यह आयोजन केवल एक फोटो प्रदर्शनी नहीं, बल्कि वडोदरा के फोटोजर्नलिस्टों के जुनून, मेहनत और संवेदनशील दृष्टिकोण को सलाम करने का अवसर है।

क्योंकि कुछ पल गुजर जाते हैं… लेकिन एक तस्वीर उन्हें हमेशा के लिए जिंदा रख देती है।

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B-4 Bihari Apt R C Dutt Road Alkapuri
Vadodara
390007

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